ईरान की आईएईए से अपील, एजेंसी को अमेरिका का राजनीतिक हथियार न बनने दें

नई द‍िल्‍ली, 10 जून . ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सदस्य देशों से अपील की है कि वे संयुक्त राष्ट्र की इस परमाणु निगरानी संस्था को एक बार फिर अमेरिका के Political हथ‍ियार के रूप में इस्तेमाल न होने दें.

इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज एजेंसी (आईआरएनए) की र‍िपोर्ट के अनुसार, बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में शामिल देशों के विदेश मंत्रियों को भेजे गए एक पत्र में अराघची ने ईरान के खिलाफ अमेरिका की ओर से तैयार किए गए प्रस्ताव को Political मकसद से प्रेरित और गलत नीयत वाला बताया. उन्होंने यह पत्र उस समय भेजा है जब आईएईए बोर्ड की जून महीने की तिमाही बैठक वियना में चल रही है, जिसमें Wednesday को ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा होनी है. बैठक से पहले अमेरिका ने ईरान के खिलाफ एक प्रस्ताव तैयार किया.

आईआरएनए की र‍िपोर्ट के अनुसार, अराघची ने कहा कि मौजूदा तनाव के लिए अमेरिका जिम्मेदार है. उन्होंने चेतावनी दी कि बोर्ड का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ किसी भी गैरकानूनी कार्रवाई को सही ठहराने के लिए नहीं किया जाना चाहिए.

जून 2025 में आईएईए बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की ओर से पारित एक प्रस्ताव का जिक्र करते हुए अराघची ने कहा कि उसके पारित होने के 24 घंटे के भीतर ही अमेरिका और इजरायल ने ईरान की आईएईए निगरानी में मौजूद परमाणु सुविधाओं पर हमले किए थे. उनके अनुसार, इन हमलों में कई ईरानी नागरिकों की मौत हुई थी.

आईआरएनए के अनुसार, ईरानी विदेश मंत्री ने सवाल उठाया कि क्या एजेंसी का फिर से इस्तेमाल ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई को सही ठहराने के लिए किया जा रहा है?

उन्होंने जून 2025 के बाद से ईरान की परमाणु सुविधाओं पर अमेरिका और इजरायल के बार-बार हुए हमलों तथा ईरानी परमाणु वैज्ञानिकों और उनके परिवारों की हत्याओं का भी ज‍िक्र किया. उन्होंने कहा कि आईएईए के इतिहास में ऐसी घटनाएं पहले कभी नहीं हुई हैं.

अराघची के मुताबिक, इन कार्रवाइयों का अंतरराष्ट्रीय कानून, वैश्विक शांति और सुरक्षा, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और आईएईए की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ा है.

उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका की ओर से तैयार किया गया प्रस्ताव हाल की घटनाओं के सिर्फ नतीजों पर ध्यान देता है, जबकि मौजूदा स्थिति की असली वजहों को जानबूझकर नजरअंदाज करता है.

अराघची ने कहा कि आईएईए बोर्ड के सदस्य जो फैसले लेंगे, उनका असर सिर्फ ईरान के मामले पर ही नहीं पड़ेगा, बल्कि एजेंसी की विश्वसनीयता, उसकी स्वतंत्रता और परमाणु अप्रसार संधि के भविष्य पर भी पड़ेगा.

एवाई/एबीएम