
New Delhi, 18 अगस्त . India द्वारा हाल के वर्षों में किए गए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) देश के निर्यात को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. केंद्र Government द्वारा Tuesday को जारी एक फैक्टशीट के अनुसार, नए व्यापार समझौता साझेदार देशों के साथ India का निर्यात लगातार बढ़ रहा है. इससे न केवल भारतीय उत्पादों की वैश्विक पहुंच बढ़ी है, बल्कि अधिक से अधिक कंपनियां इन समझौतों से मिलने वाले शुल्क संबंधी लाभों का भी उपयोग कर रही हैं.
फैक्टशीट के अनुसार, India के हालिया एफटीए साझेदार देशों के साथ व्यापारिक गतिविधियों में स्पष्ट वृद्धि दिखाई दे रही है. शुरुआती निर्यात लाभ, वरीयता प्राप्त मूल प्रमाणपत्र (प्रेफरेंशियल सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन) के बढ़ते उपयोग और विभिन्न प्रकार के उत्पादों के निर्यात में विस्तार इस बात का संकेत हैं कि भारतीय व्यवसाय इन समझौतों से मिलने वाले अवसरों का लाभ उठा रहे हैं.
Government का कहना है कि निर्यातकों को नए बाजारों तक पहुंचाने और समझौतों के तहत उपलब्ध रियायतों का लाभ दिलाने के लिए विभिन्न पहल की जा रही हैं. इन प्रयासों से छोटे और मध्यम उद्यमों को भी अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धा करने का अवसर मिल रहा है.
India द्वारा किए गए हालिया व्यापार समझौते दुनिया के कई महत्वपूर्ण बाजारों को कवर करते हैं. इससे देश के व्यापारिक संबंधों का दायरा बढ़ा है और निर्यातकों के लिए नए अवसर पैदा हुए हैं.
वित्त वर्ष 2025-26 में India का कुल वस्तु एवं सेवा निर्यात 863.1 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जिसमें 441.8 अरब डॉलर का माल निर्यात शामिल था. यह सकारात्मक रुझान वर्तमान वित्त वर्ष में भी जारी है, और अप्रैल-जून 2026 के दौरान संयुक्त निर्यात 232.73 अरब डॉलर रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 11.37 प्रतिशत अधिक है.
India के कुल निर्यात प्रदर्शन में एफटीए साझेदार देशों की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है. शुरुआती सफलता शुल्क रियायतों के उपयोग और निर्यातित उत्पादों की बढ़ती विविधता में भी दिखाई दे रही है. इससे स्पष्ट है कि भारतीय कंपनियां व्यापार समझौतों के अवसरों का अधिक प्रभावी ढंग से उपयोग कर रही हैं.
इन देशों में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और ऑस्ट्रेलिया विशेष रूप से उल्लेखनीय रहे हैं. यूएई को India का निर्यात 37.35 अरब डॉलर से अधिक पहुंच चुका है, जबकि ऑस्ट्रेलिया को निर्यात 7.28 अरब डॉलर के स्तर को पार कर गया है. यह दोनों देशों के साथ हुए हालिया व्यापार समझौतों की शुरुआती सफलता को दर्शाता है.
Government ने कहा कि किसी एफटीए का वास्तविक लाभ केवल समझौता होने से नहीं, बल्कि उसके प्रभावी उपयोग से मिलता है. इसके लिए निर्यातकों को यह प्रमाणित करना होता है कि उनके उत्पाद समझौते में निर्धारित मूल नियमों (रूल्स ऑफ ओरिजिन) को पूरा करते हैं.
इसी उद्देश्य से प्रेफरेंशियल सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन (सीओओ) जारी किया जाता है, जो पुष्टि करता है कि उत्पाद समझौते के नियमों के अनुरूप हैं और इसलिए वे आयातक देश में कम या शून्य सीमा शुल्क का लाभ प्राप्त कर सकते हैं.
Government के अनुसार, विभिन्न एफटीए के तहत इस सुविधा का उपयोग लगातार बढ़ रहा है. यूएई व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (सीईपीए) और ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौता (ईसीटीए), जो वर्ष 2022 से लागू हैं, इनके तहत बड़ी संख्या में मूल प्रमाणपत्र जारी किए गए हैं. यह दर्शाता है कि भारतीय निर्यातक शुल्क रियायतों का व्यापक उपयोग कर रहे हैं.
नए समझौतों के तहत भी सकारात्मक संकेत देखने को मिले हैं. यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ व्यापार एवं आर्थिक भागीदारी समझौता (ईएफटीए-टीईपीए) के अक्टूबर 2025 में लागू होने के बाद 7,885 मूल प्रमाणपत्र जारी किए गए. वहीं ओमान व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (सीईपीए) के जून 2026 में लागू होने के बाद अब तक 783 मूल प्रमाणपत्र जारी किए जा चुके हैं.
फैक्टशीट में कहा गया है कि मूल प्रमाणपत्रों की बढ़ती संख्या इस बात का प्रमाण है कि भारतीय निर्यातक एफटीए से मिलने वाले लाभों का तेजी से उपयोग कर रहे हैं. Government ने प्रक्रियाओं को सरल बनाकर और डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध कराकर इस प्रक्रिया को और आसान बनाया है.
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डीबीपी
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