भारत को पहली हाइड्रोजन ट्रेन मिलने का सपना साकार, यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा दिन: पीएम मोदी

New Delhi, 17 जुलाई . Prime Minister Narendra Modi Friday को India को पहली हाइड्रोजन ट्रेन की सौगात देंगे. वे जींद रेलवे स्टेशन पर जींद और सोनीपत के बीच चलने वाली पहली हाइड्रोजन ट्रेन को झंडी दिखाएंगे. इस उद्घाटन कार्यक्रम से पहले पीएम मोदी ने कहा कि यह आत्मनिर्भर India और सतत विकास की दिशा में एक बहुत बड़ा दिन है.

जींद पहुंचने से पहले Prime Minister Narendra Modi ने Friday सुबह social media प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “आज India को पहली हाइड्रोजन ट्रेन मिलने का सपना साकार होने जा रहा है. यह आत्मनिर्भर India और सतत विकास की दिशा में एक बहुत बड़ा दिन है. मैं इससे जुड़े सभी लोगों को बहुत बधाई देता हूं.”

उन्होंने ‘संस्कृत सुभाषितम्’ भी शेयर किया, जिसमें लिखा, “प्रभूतं कार्यमल्पं वा यन्नरः कर्तुमिच्छति. सर्वारम्भेण तत् कार्यं सिंहादेकं प्रचक्षते.” इसका अर्थ है, “चाहे कार्य बहुत बड़ा हो या छोटा-जिसे मनुष्य करना चाहता है, उसे पूर्ण समर्पण और नए उत्साह के साथ करना चाहिए, यही एक गुण सिंह से सीखने योग्य है.”

बता दें कि देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन India में ही डिजाइन, इंजीनियरिंग और एकीकृत की गई है. यह ट्रेन स्वदेशी तकनीक का उपयोग करके विकसित की गई है, जो उन्नत रेलवे इंजीनियरिंग में देश की बढ़ती क्षमताओं को दर्शाती है. इसके साथ ही, India उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल हो जाएगा जिनके पास हाइड्रोजन-चालित ट्रेनें परिचालन में हैं.

यह ट्रेन हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक से चलती है, जो हाइड्रोजन को बिजली में परिवर्तित करके ट्रेन को आगे बढ़ाती है. इस प्रक्रिया में सिर्फ जल वाष्प उप-उत्पाद के रूप में उत्पन्न होता है, जिसके परिणामस्वरूप रेल संचालन के दौरान कार्बन उत्सर्जन शून्य होता है.

डीजल ट्रेनों की तुलना में ये ट्रेनें टेलपाइप उत्सर्जन को खत्म करती हैं, जीवाश्म ईंधन और जीवाश्म ईंधन आयात पर निर्भरता कम करती हैं और शोर भी काफी कम करती हैं. पारंपरिक इलेक्ट्रिक ट्रेनों के विपरीत, इन्हें निरंतर ओवरहेड विद्युतीकरण बुनियादी ढांचे की जरूरत नहीं होती है, क्योंकि बिजली ट्रेन के अंदर हाइड्रोजन ईंधन सेल के माध्यम से उत्पन्न होती है. इस तरह ये ट्रेनें पर्यावरण को लेकर स्वच्छ और कुशल समाधान बन जाती हैं. हरित हाइड्रोजन का उपयोग जीवाश्म ईंधन आधारित थर्मल पावर प्लांट से उत्पन्न बिजली पर निर्भरता को भी कम करता है, जिससे India के सतत परिवहन की ओर बदलाव में सहायता मिलती है.

India की हाइड्रोजन ट्रेन में 10 कोच हैं. इस तरह यह अब तक विकसित की गई सबसे लंबी हाइड्रोजन-चालित यात्री ट्रेनों में से एक बन गई है. यह 3,200 एचपी प्रणोदन प्रणाली से संचालित है, जो इसे परिचालन में मौजूद सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन-चालित ट्रेनों में से एक है.

डीसीएच/