
New Delhi, 17 अगस्त . Monday को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, India के डीपटेक सेक्टर ने वर्ष 2015 से 2026 के बीच अब तक निजी इक्विटी (पीई) और वेंचर कैपिटल ( ) निवेश में लगभग 11.4 अरब डॉलर आकर्षित किए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, स्टार्टअप फंडिंग में व्यापक सुस्ती के बावजूद 2025 डीपटेक निवेश के लिए अब तक का सबसे मजबूत वर्ष बनकर उभरा है.
इंडियन वेंचर एंड अल्टरनेट कैपिटल एसोसिएशन (आई ए) की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 2016 के बाद से डीपटेक क्षेत्र में निवेश गतिविधियों में तेज वृद्धि देखी गई है, जो दुनिया भर में उभरती अत्याधुनिक तकनीकों की ओर बढ़ते निवेश रुझान को दर्शाती है. India में विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), जेनरेटिव एआई, इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) और बैटरी टेक्नोलॉजी ने निवेशकों को सबसे अधिक आकर्षित किया है.
इसके अलावा, सेमीकंडक्टर और स्पेसटेक ऐसे क्षेत्र रहे हैं जिन्होंने सबसे तेज विकास दर्ज किया है. India Government की सेमीकंडक्टर और अंतरिक्ष क्षेत्र को प्रोत्साहित करने वाली नीतियों ने भी निवेशकों का भरोसा बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
आई ए के अध्यक्ष रजत टंडन ने कहा कि India का डीपटेक इकोसिस्टम अब केवल संभावनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि तेजी से निवेश योग्य अवसरों वाले क्षेत्र के रूप में विकसित हो रहा है. उन्होंने कहा कि संस्थागत निवेशकों की बढ़ती भागीदारी इस परिवर्तन का स्पष्ट संकेत है.
टंडन के अनुसार, India को वैश्विक स्तर की डीपटेक कंपनियां तैयार करने के लिए कुछ प्रमुख चुनौतियों पर ध्यान देना होगा. इनमें सीरीज-बी और सीरीज-सी फंडिंग अंतर को कम करना, घरेलू लिमिटेड पार्टनर्स (एलपी) की भागीदारी बढ़ाना, बेहतर एग्जिट अवसर उपलब्ध कराना और नीतिगत ढांचे को और मजबूत बनाना शामिल है.
भौगोलिक दृष्टि से Bengaluru डीपटेक निवेश का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है. पिछले एक दशक में कुल निवेश और सौदों का लगभग आधा हिस्सा इसी शहर में हुआ. हालांकि रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि Ahmedabad, कोच्चि और कोलकाता जैसे नए केंद्र भी अब डीपटेक गतिविधियों और निवेश को आकर्षित करने लगे हैं.
रिपोर्ट के अनुसार, सर्वेक्षण में शामिल अधिकांश फंड्स ने डीपटेक क्षेत्रों में सक्रिय निवेश किया है, जिनमें सबसे अधिक रुचि एआई, जेनरेटिव एआई और सॉफ्टवेयर-एज-ए-सर्विस (सास) क्षेत्रों में देखी गई. इसके बाद स्पेसटेक और डिफेंस टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में निवेशकों की भागीदारी बढ़ रही है.
हालांकि रिपोर्ट ने एक महत्वपूर्ण चुनौती की ओर भी संकेत किया है. शुरुआती चरण के बाद निवेशकों की संख्या में तेज गिरावट देखने को मिलती है और विकास चरण में पर्याप्त पूंजी उपलब्ध नहीं हो पाती. डीपटेक कंपनियों को व्यावसायिक सफलता तक पहुंचने में अपेक्षाकृत अधिक समय लगता है, जबकि पारंपरिक फंड संरचनाएं अक्सर इतनी लंबी समयावधि के लिए तैयार नहीं होतीं. यही कारण है कि कई डीपटेक स्टार्टअप्स को सीरीज-बी और सीरीज-सी चरण में पूंजी जुटाने में कठिनाई होती है.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि India का डीपटेक निवेश आधार फिलहाल मुख्य रूप से घरेलू निवेशकों पर आधारित है. फैमिली ऑफिस, संस्थागत निवेशक और उच्च नेटवर्थ वाले व्यक्ति (एचएनआई) इसमें प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं. हालांकि हाल के वर्षों में वैश्विक निवेशकों और कॉरपोरेट एलपी की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है.
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डीबीपी
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