भारत का ‘क्रिटिकल मिनरल मिशन’ तेज: 2 साल में 35 देशों से साझेदारी और 11 देशों से बातचीत जारी, रेयर अर्थ और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन मजबूत करने पर फोकस

New Delhi, 7 जुलाई . India ने बीते 24 महीनों में रेयर अर्थ, क्रिटिकल मिनरल्स और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. Government के अनुसार, Prime Minister Narendra Modi के नेतृत्व में India ने दुनिया के 35 देशों को एक व्यापक रणनीतिक नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में काम किया है. इनमें 24 देशों के साथ विभिन्न समझौते और साझेदारियां हो चुकी हैं, जबकि 11 देशों के साथ बातचीत जारी है. इसका उद्देश्य देश की औद्योगिक जरूरतों, ऊर्जा सुरक्षा, इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी), बैटरी, रक्षा, अंतरिक्ष और सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए जरूरी खनिजों की दीर्घकालिक उपलब्धता सुनिश्चित करना है.

Government द्वारा शेयर किए गए एक ग्राफिक मैप के अनुसार, India ने उत्तरी अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका, पश्चिम एशिया, मध्य एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया और ऑस्ट्रेलिया तक अपनी साझेदारी नेटवर्क विकसित किया है. इस रणनीति का उद्देश्य केवल खनिज आयात तक सीमित नहीं है, बल्कि खोज, खनन, प्रोसेसिंग, तकनीक, निवेश और सप्लाई चेन को भी मजबूत बनाना है.

India ने अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, इटली, नीदरलैंड, जापान, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, अर्जेंटीना, डीआर कांगो, घाना, नामीबिया, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, इजरायल, वियतनाम, मोजाम्बिक, जिम्बाब्वे, मलावी, जापान और रूस के साथ अलग-अलग क्षेत्रों में सहयोग स्थापित किया है.

इन साझेदारियों में क्रिटिकल मिनरल्स, रेयर अर्थ, सेमीकंडक्टर सहयोग, लिथियम, कोबाल्ट, कॉपर, ऊर्जा सुरक्षा, निवेश, तकनीकी सहयोग और खनिज संसाधनों के विकास जैसे क्षेत्र शामिल हैं.

ग्राफिक मैप के मुताबिक, India अभी चिली, पेरू, जाम्बिया, बोलीविया, कजाकिस्तान, मंगोलिया, उज्बेकिस्तान, किर्गिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, ताजिकिस्तान, म्यांमार और इंडोनेशिया जैसे देशों के साथ भी विभिन्न समझौतों पर बातचीत कर रहा है, जिनमें खास तौर पर लिथियम, कॉपर, रेयर अर्थ और अन्य रणनीतिक खनिजों पर सहयोग की संभावनाएं तलाश की जा रही हैं.

India की यह रणनीति केवल खनिज संसाधनों तक सीमित नहीं है. ग्राफिक में स्पष्ट रूप से सेमीकंडक्टर और चिप निर्माण को भी प्राथमिकता दी गई है. जापान, नीदरलैंड, जर्मनी और अमेरिका जैसे देशों के साथ सहयोग India की चिप निर्माण क्षमता बढ़ाने और वैश्विक सप्लाई चेन में उसकी भूमिका मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

क्रिटिकल मिनरल्स जैसे लिथियम, कोबाल्ट, निकेल, कॉपर और रेयर अर्थ एलिमेंट्स इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी स्टोरेज, पवन ऊर्जा, सौर ऊर्जा, रक्षा उपकरण और हाई-टेक इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं. ऐसे में विभिन्न देशों के साथ India की साझेदारी भविष्य में स्वच्छ ऊर्जा और हरित अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को भी मजबूती दे सकती है.

ग्राफिक मैप से यह भी संकेत मिलता है कि India की रणनीति केवल खनिज खरीदने तक सीमित नहीं है. Government संयुक्त निवेश, खनिज खोज, प्रोसेसिंग, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, सेमीकंडक्टर सहयोग और दीर्घकालिक सप्लाई चेन तैयार करने पर भी समान रूप से ध्यान दे रही है, जिससे भविष्य में वैश्विक आपूर्ति संकट का असर कम किया जा सके.

डीबीपी