6 महीने पहले ही सामने आ गया था भारतीय वैरिएंट

लंदन . भारत में इस महीने कोरोना संक्रमण के मामलों में दुनिया की सबसे तेज वृद्धि दर्ज की गई है. इसके लिए दुनिया भर के विशेषज्ञ कोरोना के भारतीय वैरिएंट को जिम्मेदार मान रहे हैं, जिसकी पहचान 6 महीने पहले हो चुकी थी. इस वैरिएंट का नाम बी.1.617 है. फिलहाल 17 देशों में मिल चुका है. डब्ल्यूएचओ कहता है कि इसे सबसे पहले अक्टूबर 2020 में पहचाना गया था. पुष्टि दिसंबर 2020 में हो गई थी. यह बेहद संक्रामक है और इसमें वैक्सीन से मिली इम्यूनिटी को भी नजरअंदाज कर देने की क्षमता रखता है. नेशनल सेंटर फॉर डिजीस कंट्रोल के डायरेक्टर सुजीत कुमार सिंह बताते हैं-दिल्ली में फैलते संक्रमण के पीछे बी.117 वैरिएंट है, जो अत्यधिक संक्रामक है और इसकी सबसे पहले पहचान यूके में की गई थी.

जबकि महाराष्ट्र (Maharashtra) में फैल रहे संक्रमण के पीछे भारतीय वैरिएंट बी.1.617 जिम्मेदार है. रोम के बैम्बिनो जेसू हॉस्पीटल के इम्यूनोलॉजी विभाग के प्रमुख कार्लो फेडेरिको पेर्नो बताते हैं कि भारत में मिला यह वैरिएंट अपने दम पर इतनी तेजी से संक्रमण नहीं फैला सकता. इसको बेरोक-टोक इकट्?ठा हो रही बेपरवाह भीड़ से मदद मिल रही है. इसी भीड़ को सुपर स्प्रेडर कहें, तो गलत नहीं होगा. व्हाइट हाउस के चीफ मेडिकल एडवाइजर एंथनी फॉची के मुताबिक, शुरुआती रुझान बताते हैं कि भारत में निर्मित कोवैक्सीन इस वैरिएंट से लडऩे में सक्षम है. वहीं इंग्लैंड की पब्लिक हेल्थ संस्था ने बताया कि वो यह पता लगा रहे हैं कि वैक्सीन इस वैरिएंट में कारगर है या नहीं. अभी प्रमाणित नहीं किया जा सकता.

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