
वॉशिंगटन, 4 जून . भारतीय सेना के एक अधिकारी प्रभात मिश्रा ने अमेरिका के प्रतिष्ठित सैन्य नेतृत्व कार्यक्रम में शानदार प्रदर्शन करते हुए दो बड़े शैक्षणिक पुरस्कार अपने नाम किए. अमेरिका के कंसास स्थित फोर्ट लीवनवर्थ में आयोजित इस उन्नत सैन्य प्रशिक्षण कार्यक्रम को अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के लगभग 1,000 सैन्य अधिकारियों ने पूरा किया.
भारतीय सेना के मेजर प्रभात मिश्रा को यूएस आर्मी कमांड एंड जनरल स्टाफ कॉलेज के कमांड एंड जनरल स्टाफ ऑफिसर कोर्स के दीक्षांत समारोह में “बिरर-ब्रूक्स अवॉर्ड फॉर आउटस्टैंडिंग मास्टर ऑफ मिलिट्री आर्ट्स एंड साइंस थीसिस” और “जनरल डगलस मैकआर्थर मिलिट्री लीडरशिप राइटिंग अवॉर्ड” से सम्मानित किया गया.
ये पुरस्कार ऐसे समय दिए गए जब 951 अधिकारियों ने 10 महीने का यह प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरा किया. इस कोर्स का उद्देश्य मध्य स्तर के सैन्य अधिकारियों को वरिष्ठ नेतृत्व और स्टाफ जिम्मेदारियों के लिए तैयार करना है.
इस बैच में 120 अंतरराष्ट्रीय सैन्य अधिकारी भी शामिल थे, जो विभिन्न मित्र और साझेदार देशों से आए थे. इससे संस्थान की वैश्विक पहचान और भविष्य के सैन्य नेताओं को तैयार करने में उसकी भूमिका का पता चलता है.
समारोह को संबोधित करते हुए जिम इसेन्होवेर ने कहा कि सेना में फील्ड-ग्रेड अधिकारी बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
उन्होंने कहा, “आप बटालियन एस-3 या एग्जीक्यूटिव ऑफिसर के रूप में रोजाना सबसे निचले स्तर के सैनिक तक प्रभाव डाल सकते हैं. साथ ही आपसे सेना के वरिष्ठ नेताओं को भी प्रभावित करने और मार्गदर्शन देने की अपेक्षा की जाती है. आप सेना के केंद्र में हैं और सबसे महत्वपूर्ण वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं.”
यह कोर्स ऐसे समय में आयोजित किया गया, जब सेना के अनुसार सैन्य संचालन का माहौल तेजी से बदल रहा है. प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को शैक्षणिक कैलेंडर और अध्ययन व्यवस्था में हुए बदलावों के साथ भी तालमेल बैठाना पड़ा.
30 वर्षों से अधिक के सैन्य अनुभव का हवाला देते हुए इसेन्होवेर ने अधिकारियों से पेशेवर उत्कृष्टता के साथ-साथ सैनिकों और उनके परिवारों के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भी निभाने की अपील की.
उन्होंने कहा कि सैनिकों के साथ उनके अनुभवों ने नेतृत्व के प्रति उनका नजरिया बदला और उन्हें एक स्वस्थ संगठनात्मक संस्कृति बनाने का महत्व समझाया.
उन्होंने कहा, “मुझे एहसास हुआ कि फील्ड-ग्रेड अधिकारी इस पेशे के संरक्षक होते हैं. उनकी जिम्मेदारी भविष्य की पीढ़ियों को सेना में सेवा के लिए प्रेरित करना है, न कि उन्हें हतोत्साहित करना.”
इसेन्होवेर ने कार्य और निजी जीवन के बीच संतुलन बनाए रखने के महत्व पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि सैन्य नेता केवल अपने अधीनस्थों को ही नहीं, बल्कि उन परिवारों को भी प्रभावित करते हैं जो सैनिकों का समर्थन करते हैं. उन्होंने बताया कि सेना के लगभग 30 प्रतिशत स्वयंसेवी जवान सैन्य परिवारों से आते हैं.
समारोह में अन्य अंतरराष्ट्रीय अधिकारियों को भी सम्मानित किया गया. नॉर्वे के मेजर अलेक्जेंडर ग्रिनबर्ग को “जनरल ड्वाइट डी. आइजनहावर अवॉर्ड” और “आर्टर-डोनिफन अवॉर्ड” दिया गया. वहीं, कुवैत के लेफ्टिनेंट कर्नल तलेह अलरशिद को “मेजर जनरल हैंस श्लुप अवॉर्ड” से सम्मानित किया गया.
यूएस आर्मी कमांड एंड जनरल स्टाफ कॉलेज अमेरिकी सेना के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में से एक है. इस संस्थान ने कई पीढ़ियों के अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय अधिकारियों को उच्च सैन्य नेतृत्व के लिए प्रशिक्षित किया है. फोर्ट लीवनवर्थ स्थित यह संस्थान हर साल दुनिया के कई देशों के अधिकारियों को प्रशिक्षण देता है.
India और अमेरिका ने पिछले दो दशकों में संयुक्त सैन्य अभ्यास, अधिकारी आदान-प्रदान, रक्षा प्रौद्योगिकी पहल और सैन्य शिक्षा कार्यक्रमों के माध्यम से रक्षा सहयोग को लगातार मजबूत किया है.
अमेरिका के उन्नत सैन्य प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भारतीय अधिकारियों की बढ़ती भागीदारी दोनों देशों के बीच मजबूत होते रणनीतिक संबंधों और रक्षा सहयोग का प्रतीक मानी जा रही है.
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एएमटी/
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