भारत को सुपरपावर बनने के लिए आरसीईपी का हिस्सा बनना चाहिए: चीनी अखबार

नई दिल्ली. चीन के सरकारी अखबार ने भारत को रीजनल कॉम्प्रिहेंसिव इकनॉमिक पार्टनरशिप (आरसीईपी) में शामिल करने के लिए सुझाव दिए हैं. अखबार में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, आरसीईपी से जुड़े देशों को इस पहल में भारत को शामिल करने का मौका नहीं गंवाना चाहिए. इस सौदेबाजी में शामिल देशों को विचार करना चाहिए कि वे किस तरह भारत को इस व्यापार सौदे में शामिल होने के लिए राजी कर सकते हैं.

भारत के आरसीईपी में शामिल होने से सभी देशों को फायदा होगा. भारत को सुपरपावर बनने का सपना पूरा करने के लिए आरसीईपी का हिस्सा बनना चाहिए. भारत ने सोमवार को आरसीईपी से दूर रहने का फैसला किया था. भारत डर था कि इस समझौते से देशी बाजार आयात से पट जाएगा, जिससे घरेलू उद्योग और कृषि क्षेत्र खतरे में आ जाएंगे. अखबार में छपी रिपोर्ट में भारत को अपनी सहूलियत के हिसाब से आरसीईपी में शामिल होने का समय देने का सुझाव दिया है. इस दौरान भारत आरसीईपी सौदे को लेकर अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा कर सकता है. इसने एक अन्य विकल्प में कहा कि अगले साल 15 देशों के बीच ड्रॉफ्ट पर हस्ताक्षर के बाद बातचीत जारी रखनी चाहिए.

चीनी अखबार ने अपनी ‘इंडिया कैन बी मेजर पावर बाई जॉइनिंग आरसीईपी … ऑर नॉट’ रिपोर्ट में लिखाहै, भारत बड़ा उपभोक्ता बाजार है. वह दुनिया की प्रमुख शक्ति बनना चाहता है. इसकारण अन्य देश उस आरसीईपी डील में रखना पसंद करेंगे. आज सभी देश व्यापार के लिए एक-दूसरे पर निर्भर हैं. इन हालात में कोई भी देश वैश्विक बाजार से खुद को अलग कर बड़ी शक्ति नहीं बन सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की प्रमुख चिंता अपनी मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री को लेकर है, जिसकी वजह से वह आरसीईपी का हिस्सा नहीं बनना चाहता है.

उसकी इस चिंता को गंभीरता से लिए जाने की जरूरत है. अखबार ने कहा कि इस तरह की सौदेबाजी में कोई भी प्रगति दोनों पक्षों के हितों को ध्यान में रखकर होनी चाहिए. चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने एक दिन पहले कहा था कि भारत की चिंताओं को हल करने के लिए चीन ‘आपसी समझ’ के सिद्धांत का पालन करेगा.

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