भारत-जापान समझौतों का स्वागत, मदरसों की एटीएस जांच में सहयोग करेंगे : शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी

बरेली, 4 जुलाई . मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने भारत-जापान समझौते, उत्तर प्रदेश में मदरसों की एटीएस जांच और ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की तदफीन पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने भारत-जापान के बीच हुए समझौतों का स्वागत किया, मदरसों की जांच में पूर्ण सहयोग का भरोसा जताया और खामेनेई को लेकर अपनी संवेदना व्यक्त की.

बरेलवी ने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार, आर्थिक और अन्य क्षेत्रों से जुड़े कई महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं. इस प्रकार के समझौते देशों के प्रमुख समय-समय पर करते रहते हैं और यह India की तरक्की, विकास तथा आम जनता के हित में आवश्यक हैं.

उन्होंने कहा कि आतंकवाद एक गंभीर बीमारी है और इससे लड़ना पूरी दुनिया के लिए जरूरी है. जहां-जहां आतंकवाद मौजूद है, वहां शांति और स्थिरता प्रभावित होती है. Pakistan का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि Pakistan ने आतंकवाद को बढ़ावा दिया और आज वही देश आतंकवादी गतिविधियों से सबसे अधिक प्रभावित है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि Governmentें अक्सर आतंकवाद शब्द का इस्तेमाल करती हैं, लेकिन इसे पूरी तरह समाप्त करने के लिए ठोस योजना और प्रभावी रणनीति दिखाई नहीं देती.

उत्तर प्रदेश में मदरसों की एटीएस जांच के मुद्दे पर मौलाना ने कहा कि भाजपा Government बनने के बाद अब तक मदरसों की जांच के चार आदेश जारी हो चुके हैं और अब पांचवीं बार एटीएस जांच का आदेश दिया गया है. इस आदेश के खिलाफ मदारिस-ए-अरबिया एसोसिएशन ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया था, लेकिन अदालत ने जांच के आदेश को बरकरार रखा. पहले भी मदरसों ने जांच का स्वागत किया था और अब भी एटीएस जांच का स्वागत किया जा रहा है. एटीएस अधिकारी जब चाहें मदरसों का निरीक्षण कर सकते हैं. मदरसे खुली किताब और साफ आईने की तरह हैं, जहां कुछ भी छिपाने जैसा नहीं है. विदेशी फंडिंग, घरेलू फंडिंग, खातों, दस्तावेजों, रजिस्टरों और अन्य सभी रिकॉर्ड की जांच की जा सकती है और मदरसा प्रबंधन हर प्रकार का सहयोग करेगा.

मौलाना ने यह भी कहा कि प्रशासनिक दृष्टि से मदरसे अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अधीन आते हैं और बेहतर होता कि जांच उसी विभाग के माध्यम से कराई जाती. हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि Government ने एटीएस जांच का निर्णय लिया है तो उसका भी स्वागत है. एटीएस अधिकारी मदरसों में आकर पढ़ाई की व्यवस्था, प्रशासनिक रिकॉर्ड और संचालन प्रणाली का निरीक्षण करें तथा यह भी देखें कि सीमित संसाधनों में किस प्रकार बच्चों की शिक्षा का कार्य संचालित किया जा रहा है.

ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के संबंध में पूछे गए सवाल पर मौलाना शहाबुद्दीन रजबी बरेलवी ने कहा कि इजरायल और अमेरिका की कार्रवाई में उनकी मृत्यु हुई. चार महीने बाद उनके जनाजे का जुलूस पूरे ईरान में निकाला जा रहा है और इसमें 120 देशों के प्रतिनिधि तेहरान पहुंचे हैं. India के प्रतिनिधि भी तेहरान में मौजूद हैं और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं. पूर्व सुप्रीम लीडर का पैतृक संबंध किन्तूर गांव से रहा है. उनके अनुसार, खामेनेई के पिता शिक्षा के लिए ईरान गए थे और वहीं बस गए, जिसके बाद परिवार दोबारा अपने पैतृक गांव नहीं लौटा, लेकिन बाराबंकी के किन्तूर से उनका संबंध बना रहा. यहां के लोग समय-समय पर ईरान जाकर उनसे मुलाकात करते रहे. आज केवल किन्तूर ही नहीं, बल्कि पूरे India में लोग शोक व्यक्त कर रहे हैं.

/एबीएम