बांग्लादेश के लिए भारत जरूरी, चीन के साथ सिर्फ इंफ्रा के लिए कर रहा दोस्ती : पीके सहगल

New Delhi, 12 अगस्त . रक्षा विशेषज्ञ मेजर जनरल (रिटायर्ड) पीके. सहगल ने भारत-बांग्लादेश संबंधों, बंगाल से घुसपैठ, वीजा और स्वास्थ्य सुविधाओं के मुद्दों को लेकर के साथ खास बातचीत की. इसके साथ ही उन्होंने अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर के एक्स पोस्ट और अरुणाचल प्रदेश पर विदेश मंत्रालय की टिप्पणी पर बात की.

हाल ही में बांग्लादेश में India के राजदूत दिनेश त्रिवेदी ने Prime Minister तारिक रहमान से मुलाकात की. इसे लेकर रक्षा विशेषज्ञ पीके. सहगल ने कहा, “इसमें कोई शक नहीं है कि बांग्लादेश के Prime Minister साफतौर पर जानते हैं कि India बांग्लादेश के लिए बहुत जरूरी है. युनूस Government के दौरान दोनों देशों के बीच रिश्ते काफी खराब हो गए थे. वो साफतौर पर जानते हैं कि India के साथ संपर्क देश की आर्थिक व्यवस्था के लिए जरूरी है और दुनिया के साथ संपर्क के लिए हिंदुस्तान एकमात्र रास्ता है.”

उन्होंने आगे कहा कि वो जानते हैं कि पानी साझा करना, दोनों देशों के बीच 4 हजार किलोमीटर लंबे लाइन ऑफ कंट्रोल, राष्ट्रीय सुरक्षा, अप्रवासी, व्यापार, India से बांग्लादेश की तरफ नदियों का प्रवाह है. India काफी परेशानी खड़ी कर सकता है. लेकिन जो सबसे संवेदनशील मुद्दा है, वो शेख हसीना के प्रत्यर्पण का है. जहां तक मैं जानता हूं कि India किसी भी परिस्थिति में हसीना का प्रत्यर्पण नहीं करेगा.

पीके. सहगल ने कहा कि अगर आप ध्यान दें, तो बांग्लादेश ने Pakistan के साथ अपने संबंध बनाए रखे. यूनुस के कार्यकाल में पाक-बांग्लादेश के बीच दोस्ती इतनी बढ़ गई कि Pakistan चिकन नेक एरिया के 20 किमी के आसपास एयरफील्ड एरिया का निर्माण करना चाहता था. वो उन्हें ड्रोन और टैंकर देना चाहते थे. हालांकि, बांग्लादेश को अब एहसास हो गया है कि India काफी पास है और Pakistan हजारों मील दूर है. अगर कोई परेशानी होती है, तो India सबसे पहले मदद के लिए आगे आएगा.

उन्होंने बांग्लादेश-चीन संबंध को लेकर कहा कि वो चीन के साथ रणनीतिक संबंध चाहते हैं. वो इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए चीन का इस्तेमाल करना चाहते हैं. India के राजदूत के साथ पीएम रहमान की मुलाकात के अलावा रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के प्रमुख पराग जैन ने भी उनसे मुलाकात की. इसलिए मुझे लगता है कि यहां कई मुद्दों पर बात हुई है, जो रणनीतिक और सुरक्षा की दृष्टि से हैं.

सहगल ने कहा, “चीन की आदत है कि वह अरुणाचल प्रदेश में जगहों, खासकर पहाड़ी दर्रों, झीलों और दूसरी स्ट्रेटेजिक रूप से जरूरी जगहों के नाम बदलकर उन्हें चीनी नाम देता है. उसका मानना ​​है कि भविष्य में जब बॉर्डर विवादों पर बात होगी और उन्हें सुलझाया जाएगा, तो ये चीनी दावे और मजबूत हो जाएंगे. India ने एक नया मैप भी जारी किया है जिसमें दर्रों और झीलों समेत 27 जरूरी जगहों को भारतीय नाम दिए गए हैं.”

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