भारत ने तिमोर-लेस्ते के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांसिस्को गुटेरेस ‘लू-ओलो’ के निधन पर जताया शोक

New Delhi, 24 जून . India ने पूर्वी तिमोर (तिमोर-लेस्ते) के पूर्व President फ्रांसिस्को गुटेरेस ‘लू-ओलो’ के निधन पर Wednesday को गहरा शोक व्यक्त किया. विदेश मंत्रालय ने कहा कि गुटेरेस दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने में उनके योगदान के लिए याद किए जाएंगे.

एमईए प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने social media प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, “पूर्वी मामलों के सचिव रुद्रेंद्र टंडन New Delhi स्थित पूर्वी तिमोर के दूतावास गए और शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए. उन्होंने India Government की ओर से दिवंगत President के परिवार, Government और जनता के प्रति संवेदना व्यक्त की. डॉ. फ्रांसिस्को गुटेरेस ‘लू-ओलो’ India और तिमोर-लेस्ते के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए हमेशा याद किए जाएंगे.”

गुटेरेस ‘लू-ओलो’ (71) का Sunday को मलेशिया के एक अस्पताल में निधन हो गया, जहां वे उपचाराधीन थे. तिमोर-लेस्ते की न्यूज एजेंसी टाटोली ने इसकी जानकारी दी थी. उनके परिजनों ने इसे उनकी पत्नी, बच्चों, फ्रेटिलिन (Political दल), स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाले सभी लोगों के लिए “गहरी क्षति” बताया.

गुटेरेस ने 1974 में राष्ट्रीय मुक्ति आंदोलन से जुड़े थे और उन्होंने इंडोनेशियाई कब्जे का जवाब देने में सक्रिय भूमिका निभाई थी. 1998 में वो फ्रेटिलिन सशस्त्र संघर्ष से उपजी Political पार्टी के प्रमुख बने.

दरअसल, 1974 में फ्रेटिलिन की स्थापना हुई थी. पार्टी ने 28 नवंबर 1975 को पुर्तगाल से पूर्वी तिमोर के आजाद होने का एकतरफा ऐलान कर दिया था. इस ऐलान के तुरंत बाद इंडोनेशिया ने पूर्वी तिमोर पर हमला बोल दिया था. इसके बाद फ्रेटिलिन ने इंडोनेशियाई कब्जे के खिलाफ एक लंबा और खूनी सशस्त्र संघर्ष चलाया. इसके सशस्त्र विंग को ‘फालिनटिल’ कहा जाता था.

तिमोर-लेस्ते के स्वतंत्रता जनमत संग्रह के बाद, गुटेरेस 2021 में संविधान सभा के अध्यक्ष चुने गए. राष्ट्रीय संसद के अध्यक्ष के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने 2022 में तिमोर-लेस्ते की स्वतंत्रता की पुनर्स्थापना की घोषणा की. वे 2002 से 2007 तक संसद के अध्यक्ष (स्पीकर) रहे और 2017 से 2022 तक देश के President के रूप में कार्य किया.

केआर/