
New Delhi, 28 जुलाई . India और चीन ने लिपुलेख, शिपकी ला और नाथू ला दर्रों के जरिए सीमा व्यापार फिर से शुरू करने की दिशा में अपने पहले के समझौते पर अमल तेज कर दिया है. विदेश मंत्रालय (एमईए) ने Tuesday को इसकी जानकारी दी. मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि दोनों देश अगस्त 2025 में बनी सहमति को आगे बढ़ा रहे हैं.
साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में जायसवाल ने कहा कि 19 अगस्त 2025 को जारी संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति में दोनों देशों ने लिपुलेख, शिपकी ला और नाथू ला जैसे तीन निर्धारित व्यापारिक मार्गों से सीमा व्यापार बहाल करने पर सहमति जताई थी.
उन्होंने कहा,”यह फैसला उसी समय लिया गया था और उस दौरान हुई चर्चाओं की जानकारी भी साझा की गई थी. अब उसी समझ के अनुरूप आगे की प्रक्रिया को अमल में लाया जा रहा है.”
अगस्त 2025 में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने New Delhi में चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ सीमा विवाद पर विशेष प्रतिनिधियों (एसआर) की वार्ता की थी. इस दौरान वांग यी ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से द्विपक्षीय बैठक की और Prime Minister Narendra Modi से भी मुलाकात की थी.
विदेश मंत्रालय के अनुसार, जयशंकर और वांग यी की बैठक में दोनों देशों ने लिपुलेख, शिपकी ला और नाथू ला दर्रों के माध्यम से सीमा व्यापार फिर से शुरू करने पर सहमति व्यक्त की थी. इसके बाद दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय कूटनीतिक संपर्क लगातार जारी रहे.
इसी क्रम में विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने अपनी मौजूदा चीन यात्रा के दौरान बीजिंग में चीन की उप विदेश मंत्री हुआ चुनयिंग से मुलाकात की. दोनों पक्षों ने भारत-चीन संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा की और व्यापार, आर्थिक सहयोग, सांस्कृतिक आदान-प्रदान तथा लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर चर्चा की.
दोनों देशों ने इस बात पर भी सहमति जताई कि द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाए रखने के लिए भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना बेहद आवश्यक है.
इससे पहले पिछले सप्ताह फिलीपींस की राजधानी मनीला में आसियान बैठकों के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर और वांग यी के बीच भी मुलाकात हुई थी. इस बैठक में सीमा क्षेत्रों में शांति, द्विपक्षीय संबंधों तथा क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई थी.
बैठक में जयशंकर ने स्पष्ट कहा था कि भारत-चीन संबंधों के सामान्य होने के लिए सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता सबसे पहली और अनिवार्य शर्त है. उन्होंने कहा कि अक्टूबर 2024 से दोनों देश इस उद्देश्य की दिशा में काम कर रहे हैं और संबंधित तंत्र को लगातार मजबूत बनाए रखने की जरूरत है.
विदेश मंत्रालय का मानना है कि सीमा व्यापार की बहाली दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली और आर्थिक सहयोग को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है.
–
केआर/
Skip to content