भारत और ब्राजील ने डिजिटल और दूरसंचार सहयोग को बढ़ावा देने के लिए सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी समझौता ज्ञापन पर किए हस्ताक्षर

New Delhi, 21 अगस्त . India और ब्राजील ने डिजिटल और दूरसंचार क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत बनाने के लिए सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) से संबंधित एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं. यह समझौता पुणे में आयोजित 12वीं ब्रिक्स संचार मंत्रियों की बैठक के दौरान संपन्न हुआ.

दूरसंचार विभाग के अनुसार, इस समझौते का उद्देश्य डिजिटल नवाचार को बढ़ावा देना, डिजिटल अवसंरचना (इंफ्रास्ट्रक्चर) को मजबूत करना और उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाना है. यह पहल दोनों देशों के बीच तकनीकी साझेदारी को नई दिशा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.

समझौता ज्ञापन पर India की ओर से केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया और ब्राजील की ओर से संचार मंत्री फ्रेडेरिको डी सिकेरा फिल्हो ने हस्ताक्षर किए.

सिंधिया ने social media प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि यह समझौता सार्वभौमिक कनेक्टिविटी, साइबर सुरक्षा, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, उभरती प्रौद्योगिकियों, क्षमता निर्माण और सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को और गहरा करेगा.

उन्होंने कहा कि यह समझौता सुरक्षित, समावेशी और भविष्य उन्मुख डिजिटल व्यवस्था के निर्माण के लिए India और ब्राजील के बीच सहयोग को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.

ब्रिक्स सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी मंच में सदस्य देशों के सरकारी अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, शिक्षाविद, नवाचार-आधारित उद्यम और शोध संस्थान शामिल हुए. यह मंच वर्ष 2021 में India की मेजबानी में आयोजित सातवीं ब्रिक्स संचार मंत्रियों की बैठक के दौरान संस्थागत रूप से स्थापित किया गया था और अब ब्रिक्स देशों के बीच डिजिटल सहयोग का प्रमुख मंच बन चुका है.

बैठक के दौरान आयोजित पहले विषयगत सत्र में साइबर सुरक्षा, भरोसेमंद सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी और बाल ऑनलाइन सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई, जिसमें डिजिटल परिवर्तन के साथ सुरक्षा और विश्वास बनाए रखने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया.

ब्रिक्स देशों के मंत्रियों ने लगातार इस बात पर बल दिया है कि डिजिटल विकास को आगे बढ़ाने के साथ-साथ गोपनीयता की रक्षा, सार्वजनिक हित और कमजोर वर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है.

दूसरे विषयगत सत्र में टिकाऊ और लचीले डिजिटल एवं सूचना-प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र पर चर्चा हुई, जिसमें सभी के लिए सुलभ और किफायती डिजिटल कनेक्टिविटी, ऊर्जा-कुशल और जलवायु-अनुकूल डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तथा उपग्रह-आधारित और गैर-स्थलीय संचार प्रणालियों जैसी उभरती तकनीकों की भूमिका पर विचार-विमर्श किया गया.

डीबीपी