
चेन्नई, 1 जून . तमिलनाडु में खाद की कीमतों में बढ़ोतरी होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है. किसानों की ओर से चेतावनी दी गई कि इस कदम से खेती का खर्च काफी बढ़ सकता है.
खाद की कीमतों में बढ़ोतरी होने से किसानों के सामने चुनौतियां और बढ़ गई हैं. कृषि संगठनों की ओर से बताया गया कि बीज, मजदूरी, सिंचाई, मशीनरी और खेती के लिए जरूरी अन्य चीजों की बढ़ती कीमतों के कारण खेती की लागत लगातार बढ़ रही है.
अब खाद की कीमतों में बढ़ोतरी से किसानों की आर्थिक स्थिति पर और दबाव पड़ने और उनके मुनाफे में कमी आने की आशंका है.
किसानों ने बताया कि एनपीके मिश्रण, मिश्रित उर्वरक, पोटाश, सल्फेट और फास्फोरस जैसे पोषक तत्वों वाले उर्वरकों का इस्तेमाल धान, गन्ना, सब्जियों और बागवानी उत्पादों सहित कई तरह की फसलों में बड़े पैमाने पर किया जाता है.
खेती के लिए जरूरी इन चीजों की कीमतों में किसी भी बढ़ोतरी का सीधा असर खेती की कुल लागत पर पड़ता है और इससे किसानों की आमदनी पर भी काफी असर पड़ सकता है. हालिया बदलावों के बाद एनपीके उर्वरक की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है, जबकि मिश्रित उर्वरकों और पोटाश की कीमतें काफी बढ़ा दी गई हैं.
कृषि प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि खेती के लिए जरूरी चीजों की कीमतों में अचानक हुई बढ़ोतरी से किसानों के अंदर अपनी फसल योजनाओं को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है. खबरों के मुताबिक, कई किसान अब यह दोबारा सोच रहे हैं कि वे कितनी जमीन पर खेती कर सकते हैं; खासकर वे किसान जो कर्ज लेकर खेती करते हैं या जिनके पास खेती के लिए बहुत कम जमीन है.
किसान समुदाय ने राज्य और केंद्र, दोनों Governmentों से अपील की है कि वे इस मामले में दखल दें और उर्वरकों की कीमतों को स्थिर करने के लिए जरूरी कदम उठाए. उनका कहना है कि खेती के लिए जरूरी चीजों का उचित कीमतों पर उपलब्ध होना, खेती की उत्पादकता बनाए रखने और देश में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बेहद जरूरी है.
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एसडी/एएस
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