हादसे में बच्ची का चेहरा दो हिस्सों में बंटा डॉक्टरों ने दोबारा बनाकर दी नई जिंदगी

नई दिल्ली (New Delhi) . हैलट के जूनियर डॉक्टरों (Doctors) ने कर्तव्यनिष्ठा की जीती-जागती मिसाल पेश की. हादसे में एक बच्ची अपना पूरा चेहरा खो चुकी थी. किसी को नहीं लग रहा था कि वह दोबारा बोलेगी भी पर धरती के भगवान आगे आए. दो घंटे मेहनत की. टांके से चेहरा फिर से बना दिया और बच्ची बोलने लगी. इसके बाद आगे के इलाज के लिए उसे लखनऊ (Lucknow) ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया गया है. उन्नाव निवासी 10 वर्षीय खुशबू अपने पिता तेज सिंह और मां गायत्री के साथ बाइक से घर जा रही थी. पिता ने अचानक ब्रेक लगाया तो तीनों सड़क पर गिरकर ट्रक की चपेट में आ गए. तेज सिंह की मौके की मौत हो गई. मां भी गंभीर रूप से घायल हो गई. बच्ची का पूरा चेहरा खुल गया. वह मरणासन्न हालत में हैलट इमरजेंसी (Emergency) लाई गई. ईएनटी सर्जरी विभाग के जूनियर डॉक्टर (doctor) डॉ. काजी, नेत्र रोग विभाग के डॉ. कल्याण और सर्जरी विभाग के डॉ. सृजन त्रिपाठी ने मिलकर बच्ची को ओटी में ले लिया और चेहरे की कांस्ट्रक्टिव सर्जरी कर दी. चेहरे पर टांके लगाकर ब्लीडिंग रोगी और क्षतिग्रस्त मांसपेशियों को सही किया. डॉ. सृजन त्रिपाठी का कहना है कि बच्ची की हल्की सांस चल रही थी.

उसकी जान बचाने के लिए कुछ तो करना था. प्रयास कामयाब रहा. बच्ची के चेहरे की पूरी हड्डियां टूटी हैं. उसके सीने में भी चोट है. पैर में फ्रैक्चर है. आगे के इलाज के लिए उसे ट्रामा सेंटर लखनऊ (Lucknow) भेजा गया है. उसके चेहरे का दोबारा ऑपरेशन किया जा सकता है. इंटेंसिव केयर की जरूरत पड़ेगी. प्रमुख अधीक्षक प्रो. आरके मौर्या ने कहा कि छात्रों ने अदभुत काम किया है. इसी तरह की तत्परता से मरीजों को कुछ हद तक मैनज किया जा सकता है. फिलहाल बच्ची की जान बच गई है

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