पाकिस्तान में गृह मंत्री मोहसिन नकवी के बयान से सत्ता गठबंधन में हलचल, ’70 साल पुरानी व्यवस्था विफल’ बताने पर उठे सवाल

इस्लामाबाद, 5 अगस्त . Pakistan के गृह मंत्री मोहसिन नकवी के हालिया बयान ने देश की सियासत में नई बहस छेड़ दी है. नकवी ने मौजूदा शासन व्यवस्था को “पूरी तरह विफल” बताते हुए कहा कि इस सिस्टम के जरिए देश की समस्याओं का समाधान संभव नहीं है. उनके इस बयान के बाद सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर भी असहजता बढ़ गई है.

Pakistan के प्रमुख अखबार डॉन में प्रकाशित वरिष्ठ पत्रकार जाहिद हुसैन के लेख के मुताबिक, नकवी का बयान ऐसे समय आया है जब उन्हें खुद उसी व्यवस्था का हिस्सा माना जाता है, जिसकी वैधता पर अब वे सवाल उठा रहे हैं. लेख में कहा गया है कि सत्ता प्रतिष्ठान से उनके करीबी संबंधों को देखते हुए उनके बयान को महज निजी राय नहीं माना जा सकता.

पिछले सप्ताह आयोजित Pakistan इकोनॉमिक समिट में नकवी ने सभी Political दलों से शासन व्यवस्था में व्यापक सुधारों पर बातचीत करने की अपील की थी. उन्होंने नए प्रांतों के गठन और प्रशासनिक सुधारों का भी सुझाव दिया.

नकवी ने कहा था, “जिस व्यवस्था के तहत हम रह रहे हैं, वह ढह चुकी है. इससे समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता.” उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यही व्यवस्था जारी रही तो 10 साल बाद भी देश उन्हीं समस्याओं पर चर्चा करता रहेगा. उन्होंने यह भी कहा कि पिछले 70 वर्षों से यही “विफल व्यवस्था” चल रही है और कृषि प्रधान देश होने के बावजूद Pakistan को गेहूं आयात करना पड़ रहा है.

उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब Pakistan में महंगाई, ईंधन की बढ़ती कीमतों और बढ़ती आर्थिक परेशानियों को लेकर जनता का असंतोष लगातार बढ़ रहा है.

जाहिद हुसैन ने अपने लेख में लिखा कि नकवी की यह अप्रत्यक्ष आलोचना मौजूदा Government की नीतियों पर भी सवाल खड़े करती है और 2024 के विवादित आम चुनावों के बाद बने हाइब्रिड Political ढांचे की अंदरूनी दरारों को उजागर करती है. उन्होंने उल्लेख किया कि बाद में सेना के प्रवक्ता ने भी नकवी के प्रशासनिक सुधार संबंधी सुझावों का समर्थन किया और Political दलों से शासन व्यवस्था में बदलाव पर विचार करने की अपील की.

लेख के अनुसार, नकवी के बयान से सत्तारूढ़ गठबंधन में हलचल मच गई है. कई केंद्रीय मंत्रियों ने उनके अधिकार और भूमिका पर सवाल उठाए. हालांकि, वे यह भी मानते हैं कि नकवी न तो मंत्रिमंडल और न ही Prime Minister के प्रति जवाबदेह हैं. रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने उन्हें “पावरहाउस” बताते हुए कहा कि वे किसी के प्रति जवाबदेह नहीं हैं. लेख में यह भी कहा गया कि नकवी क्रिकेट से लेकर सुरक्षा और विदेश नीति तक कई अहम मामलों में सक्रिय रहते हैं, जबकि वे न किसी Political दल के सदस्य हैं और न ही नियमित रूप से कैबिनेट बैठकों या संसद में नजर आते हैं. विश्लेषकों का मानना है कि उनकी ताकत सत्ता प्रतिष्ठान से करीबी संबंधों से आती है.

जाहिद हुसैन ने लिखा कि नकवी का यह कहना सही हो सकता है कि व्यवस्था लंबे समय से विफल रही है, लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि Pakistan के अधिकांश इतिहास में सुरक्षा प्रतिष्ठान का प्रभाव कितना प्रमुख रहा है.

लेख में यह भी कहा गया कि मौजूदा हाइब्रिड और लगातार अधिक केंद्रीकृत होती व्यवस्था के कमजोर पड़ने के संकेत पहले से दिखाई दे रहे थे. केवल नए चेहरे लाने या नए प्रशासनिक इकाइयों का गठन करने से देश की समस्याओं का समाधान नहीं होगा. कई लोग नकवी के बयान को जनता का ध्यान वास्तविक मुद्दों से हटाने और सत्ता पर पकड़ मजबूत करने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं.

जाहिद हुसैन ने खैबर पख्तूनख्वा, बलूचिस्तान और Pakistan अधिकृत कश्मीर (पीओके) में बिगड़ती कानून-व्यवस्था का भी जिक्र करते हुए कहा कि Government Political समस्याओं का समाधान केवल सुरक्षा बलों के जरिए तलाश रही है. उन्होंने सवाल उठाया कि खबरों पर रोक लगाने से जमीनी हकीकत नहीं बदल सकती और गृह मंत्री को नई प्रशासनिक इकाइयों की बजाय देश की सुरक्षा व्यवस्था पर अधिक ध्यान देना चाहिए.

डीएससी