
Bhopal , 18 जुलाई . Madhya Pradesh के पूर्व राज्य मंत्री दीपक जोशी ने Prime Minister Narendra Modi को पत्र लिखकर मनरेगा योजना की हकीकत बताई है l उन्होंने पत्र में लिखा है कि राज्य में इस योजना में एक प्रतिशत जॉब कार्डधारक परिवार भी ऐसे नहीं है, जिन्हें बीते 10 साल में 100 दिन का रोजगार मिला हो l
पूर्व मंत्री दीपक जोशी ने Prime Minister को लिखे पत्र में कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी रोजगार देने वाली योजना मनरेगा है, जिसमें वर्तमान में 15 करोड़ जॉब कार्ड के साथ 26 करोड़ मजदूर पंजीकृत हैं l मनरेगा में एक जॉबकार्ड धारी मजदूर को साल में 100 दिवस रोजगार देने का प्रावधान था. इस योजना को अब ‘विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (वीबी-जी राम जी) के नाम से लागू किया गया है l
पूर्व राज्य मंत्री ने अपने राज्य विधानसभा में पेश किए गए आंकड़ों का हवाला देते हुए पत्र में आगे लिखा है कि Madhya Pradesh में पिछले 10 साल के आंकड़े देखें तो प्रदेश में कुल जॉब कार्ड धारी परिवारों में से एक प्रतिशत परिवारों को भी पूरे 100 दिन का रोजगार नहीं दिया गया है, और नई स्कीम में प्रत्येक जॉब कार्ड धारी परिवार को 125 दिन के रोजगार देने की बात की जा रही है, जबकि पिछले कई वर्ष के आंकड़े देखें तो लगातार मनरेगा जॉब कार्ड धारी मजदूर मनरेगा के अंतर्गत मजदूरी मांगते रहे, लेकिन उन्हें मजदूरी प्राप्त नहीं हुई है.
जोशी में आगे कहा कि Madhya Pradesh में वन अधिकार क्षेत्र के पट्टा धारकों को मनरेगा के अंतर्गत डेढ़ सौ दिन रोजगार देने का प्रावधान था, लेकिन जब जानकारी जुटाई तो स्थिति शून्य निकली. सांसद आदर्श ग्रामो में मनरेगा रोजगार की स्थिति निराशाजनक रही है. मनरेगा के नए नाम में आजीविका मिशन शब्द भी जोड़ा गया है. प्रदेश में आजीविका मिशन में करोड़ों रुपए के भ्रष्टाचार सामने आए हैं. पोषण आहार घोटाला, गणवेश घोटाला, मिशन में भर्ती घोटाला और आजीविका मिशन की ग्रामीण गरीब, दलित, आदिवासी माहिलाओ के समूह, ग्रामसंगठन, फेडरेशन के खातों से लाखो-करोड़ो की राशि मिशनकर्मियो द्वारा निकालने सम्बन्धी घोटाले सामने आ रहे हैं, जांच के नाम पर सिर्फ लीपापोती हो रही है.
पूर्व मंत्री ने Prime Minister से अनुरोध किया है कि नई योजना में भगवान राम का नाम (वीबी जीआरएएम जी) भी लिया जा रहा है, इसलिए योजना को पारदर्शी तरीके से संचालित कर ज्यादा से ज्यादा गरीब जॉब कार्ड धारी ग्रामीण मजदूर परिवारों को 125 दिवस का रोजगार मिलना चाहिए.
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एसएनपी/डीकेपी
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