
वॉशिंगटन, 11 जून . अमेरिकी नीति को मजबूत करने के लिए रिपब्लिकन पार्टी के एक वरिष्ठ लॉमेकर ने एक संशोधन पेश किया है. इस नीति के तहत, दलाई लामा के उत्तराधिकारी का चयन पूरी तरह से तिब्बती बौद्ध अधिकारियों की ओर से तय किया जाने वाला एक धार्मिक मामला है. लॉमेकर ने चेतावनी दी है कि चीन, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) के प्रति वफादार उत्तराधिकारी को नियुक्त करने की कोशिश कर सकता है.
इस हफ्ते हाउस फॉरेन अफेयर्स कमिटी की बैठक में बोलते हुए कमिटी के चेयरमैन माइकल मैककॉल ने लॉमेकर्स से इस संशोधन का समर्थन करने की अपील की. इस दौरान उन्होंने कहा कि इससे यह साफ हो जाएगा कि अमेरिकी Government दलाई लामा के उत्तराधिकार को पूरी तरह से उनके कार्यालय की ओर से तय किया जाने वाला एक आध्यात्मिक मामला मानती है, न कि बीजिंग की ओर से.
मैककॉल ने कहा, “2024 में, मैंने India के धर्मशाला में एक द्विदलीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया था. इस दौरान दलाई लामा से मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था. दलाई लामा सबसे असाधारण लोगों में से एक हैं. वे गर्मजोशी, बुद्धिमत्ता और हास्य-विनोद से भरे हुए हैं.
मुलाकात को याद करते हुए मैककॉल ने कहा कि एक समय उन्होंने मेरी ओर देखा और मुस्कुराए और मुझसे कहा कि वे 110 साल तक जीने की योजना बना रहे हैं. उन्होंने कहा कि दलाई लामा के स्वास्थ्य और लंबी उम्र के बावजूद उत्तराधिकार के मुद्दे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
लॉमेकर ने आगे कहा कि मुझे उम्मीद है कि वे सही हैं. लेकिन हम अमेरिकी विदेश नीति को इस उम्मीद पर नहीं बना सकते कि एक व्यक्ति हमेशा जीवित रहेगा. उन्होंने कहा कि दलाई लामा की ओर से कहा गया कि वे चीन में नहीं, बल्कि आजादी के माहौल में पुनर्जन्म लेंगे. दलाई लामा का उत्तराधिकारी कौन होगा, यह सवाल सामने आ रहा है और बीजिंग यह बात जानता है.
मैककॉल ने उत्तराधिकार प्रक्रिया को नियंत्रित करने की तैयारी को लेकर चीन पर आरोप लगाया. उन्होंने कहा, “2007 में, कम्युनिस्ट पार्टी ने खुद को यह तथाकथित अधिकार दे दिया कि दलाई लामा का उत्तराधिकारी कौन होगा. जरा इस बात पर गौर करें, एक आधिकारिक तौर पर नास्तिक Government तिब्बती लोगों के धार्मिक मामलों में ऐसा अधिकार ले रही है.”
उन्होंने चीन के हाल ही में लागू किए गए “जातीय एकता और प्रगति को बढ़ावा देने वाले कानून” का हवाला देते हुए, जातीय और धार्मिक अल्पसंख्यकों पर बीजिंग के बढ़ते नियंत्रण की भी आलोचना की.
मैककॉल के अनुसार, यह संशोधन 2020 में पारित द्विदलीय (तिब्बती नीति और समर्थन अधिनियम) पर आधारित है.
उन्होंने कहा, “दलाई लामा पहले ही बता चुके हैं कि उनके जाने के बाद उनके उत्तराधिकारी की पहचान कैसे की जाएगी? यह अधिकार उनके अपने कार्यालय और वरिष्ठ धर्मगुरुओं के पास होगा. मेरा संशोधन इस बात की पुष्टि करता है कि अमेरिकी नीति भी इसी प्रक्रिया को मान्यता देती है और इसमें चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) की कोई भूमिका नहीं है.”
मैककॉल ने तर्क दिया कि यह मुद्दा केवल धार्मिक स्वतंत्रता से कहीं आगे का है और इसके क्षेत्र के लिए व्यापक रणनीतिक निहितार्थ हैं. उन्होंने कहा, “यह सिर्फ आस्था का मामला नहीं है; यह राष्ट्रीय सुरक्षा का भी मामला है.”
उन्होंने कहा कि अगर हम हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे, तो बीजिंग एक नकली दलाई लामा को सामने लाएगा. एक ऐसा आध्यात्मिक नेता जो तिब्बती लोगों के प्रति नहीं, बल्कि कम्युनिस्ट पार्टी के प्रति वफ़ादार होगा और चीन पूरे हिमालयी क्षेत्र (नेपाल, मंगोलिया और हमारे सहयोगी India की सीमा के ठीक पास) में अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए उसका इस्तेमाल करेगा.
तिब्बती आध्यात्मिक नेता के साथ अपनी मुलाकात का जिक्र करते हुए मैककॉल ने कहा, “हमें उनकी इस इच्छा का सम्मान करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि यह फैसला उन्हीं का और उनके ही लोगों का हो, न कि उस Government का जिसने दशकों से उन्हें (दलाई लामा) मिटाने की कोशिश की है.”
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एसडी/एएस
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