
Mumbai , 22 अप्रैल . भारतीय संगीत की दिग्गज गायिका आशा भोसले का 12 अप्रैल को 92 साल की उम्र में निधन हो गया था. उनकी विरासत हमेशा से चर्चा में रही है. इस बीच, आशा भोसले के पोते चिंटू भोसले ने को दिए इंटरव्यू में अपने अनुभव, सोच और संगीत को लेकर बात की. उन्होंने बताया कि असली संगीत कैसे महसूस किया जाता है, और स्टेज परफॉर्मेंस का असली मतलब क्या होता है.
से बात करते हुए चिंटू भोसले ने कहा, ”मेरे एक हालिया गाने में पुराने पलों की तस्वीरें और यादें शामिल हैं. यह गाना मेरी जिंदगी के उन हिस्सों का आईना है, जब हम साथ यात्रा करते थे, शूटिंग करते थे और अलग-अलग जगहों पर संगीत के साथ जीवन जीते थे. जो तस्वीरें इसमें इस्तेमाल की गई हैं, वे हमारे अपने व्यक्तिगत सफर की हैं.”
उन्होंने लाइव परफॉर्मेंस और स्टूडियो रिकॉर्डिंग के फर्क को भी आसान तरीके से समझाया. उन्होंने कहा, ”स्टूडियो में कलाकार पूरी तरह शांति और ध्यान के साथ गाता है, जहां हर सुर को परफेक्ट बनाने की कोशिश होती है. लाइव शो में माहौल बिल्कुल अलग होता है. वहां सामने दर्शक होते हैं, उनकी तालियां, उनकी ऊर्जा और उनका उत्साह कलाकार को प्रभावित करता है. इसी कारण कई बार परफॉर्मेंस के दौरान सुर और भावनाओं में फर्क आ जाता है.”
उन्होंने पुराने दिनों को याद करते हुए एक मजेदार किस्सा भी साझा किया. उन्होंने कहा, ”जब मैं स्टेज पर परफॉर्म करता था तो बेहद उत्साहित हो जाता था. कभी मैं बंदर की तरह स्टेज पर कूदता था, तो कभी नाचने लगता था. लोग मुझे देखकर हंसते थे. मेरे लिए संगीत का मतलब सिर्फ खड़े होकर गाना नहीं था, बल्कि उसे पूरी तरह जीना था.”
उन्होंने कहा, ”मैंने धीरे-धीरे समझा कि हर परफॉर्मेंस का अपना एक संतुलन होता है. कलाकार को अपनी ऊर्जा और सुर दोनों को संभालना होता है. इसी अनुभव ने मुझे सिखाया कि संगीत सिर्फ तकनीक नहीं है, बल्कि भावनाओं का संतुलन है, जहां दर्शक और कलाकार दोनों एक-दूसरे से जुड़े होते हैं.”
आशा भोसले जैसे महान नाम से जुड़ी विरासत पर बात करते हुए चिंटू ने कहा, ”मुझ पर कभी भी कोई दबाव नहीं रहा. मैं खुद को किसी की नकल के तौर पर नहीं देखता, बल्कि अपनी अलग पहचान बनाने में विश्वास रखता हूं. मेरी कोशिश हमेशा यही रही है कि मैं अपने संगीत को अपनी तरह से पेश करूं.”
उन्होंने बच्चों के लिए संगीत शिक्षा को आसान और रोचक बनाने की भी बात कही. उन्होंने बताया, “आज की पीढ़ी लंबे समय तक एक ही चीज पर ध्यान नहीं दे पाती, इसलिए हमने एक ऐसा म्यूजिक प्रोजेक्ट शुरू किया है, जिसमें संगीत को कैरेक्टर्स और कहानियों के जरिए सिखाया जाता है, ताकि बच्चे उसे बोरिंग न समझें.”
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पीके/एबीएम
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