मैंने पिता को खोया, परिवार के लिए बहुत दुख का समय : ऋतु खंडूरी भूषण

देहरादून, 19 मई . उत्तराखंड के पूर्व Chief Minister और भाजपा के वरिष्ठ नेता मेजर जनरल (रिटायर्ड) भुवन चंद्र खंडूरी के निधन पर विधानसभा की स्पीकर और पुत्री ऋतु खंडूरी भूषण ने दुख जताया है. उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि यह परिवार के लिए दुख का समय है. मैंने अपने पिता को खोया है. ईश्वर की जो इच्छा होती है, वही होता है.

देहरादून में मीडिया से बातचीत के दौरान ऋतु खंडूरी भूषण ने कहा कि इस वक्त बोलना मेरे लिए थोड़ा कठिन हो रहा है. एक पिता के रूप में मैंने जो उनसे सीखा और देखा, वह अविस्मरणीय है. उन्होंने देश की सेवा में लगातार योगदान दिया. उन्होंने तीन युद्ध लड़े और बच्चों को वही संस्कार दिए कि देश के लिए जीना है और देश के लिए मरना है.

उन्होंने आगे बताया कि वे बहुत हिम्मती थे. पिछले 50 दिनों से अस्पताल में भर्ती थे. हालत सुधर रही थी, चीजें बेहतर हो रही थीं. डॉक्टर भी हैरान थे कि वे ठीक हो रहे थे, लेकिन आज अचानक सुबह कार्डियक अरेस्ट आया और उन्हें रिवाइव नहीं किया जा सका.

बता दें कि उत्तराखंड के पूर्व Chief Minister भुवन चंद्र खंडूरी का देहरादून के मैक्स अस्पताल में निधन हो गया. वह 91 साल के थे और लंबे समय से बीमार चल रहे थे.

भुवन चंद्र खंडूरी उत्तराखंड भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल थे. वह सेना से राजनीति में आए थे और अपनी सादगी, अनुशासन तथा ईमानदार छवि के लिए जाने जाते थे.

उन्होंने दो बार उत्तराखंड के Chief Minister के रूप में कार्यभार संभाला. उनका पहला कार्यकाल वर्ष 2007 से 2009 तक और दूसरा कार्यकाल 2011 से 2012 तक रहा. अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाया और राज्य में पारदर्शी एवं अनुशासित प्रशासन स्थापित करने के लिए कई अहम कदम उठाए.

उनके निधन की खबर से Political और सामाजिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है. प्रदेश के Chief Minister पुष्कर सिंह धामी ने उनके निधन पर दुख जताया है. उन्होंने social media पर लिखा, “उत्तराखंड के पूर्व Chief Minister मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी (सेवानिवृत्त) के निधन का दुखद समाचार प्राप्त हुआ. खंडूरी जी ने भारतीय सेना में रहते हुए राष्ट्र सेवा, अनुशासन और समर्पण का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया. सैन्य जीवन से लेकर सार्वजनिक जीवन तक उनका व्यक्तित्व राष्ट्रहित और जनसेवा के प्रति समर्पित रहा.”

डीकेएम/एबीएम