‘मैं समंदर हूं… लौटकर आऊंगा’, देवेंद्र फडणवीस की भविष्यवाणी और सत्ता में दमदार वापसी की कहानी

New Delhi, 21 जुलाई . 22 जुलाई की तारीख केवल Maharashtra के Chief Minister देवेंद्र फडणवीस का जन्मदिन नहीं है. यह उस Political सफर को याद करने का अवसर है, जिसने भारतीय राजनीति में संघर्ष, धैर्य और वापसी की एक अलग मिसाल कायम की. Maharashtra विधानसभा में 1 दिसंबर 2019 को विपक्ष के नेता के रूप में दिया गया उनका एक संवाद सबसे चर्चित बयानों में गिना जाता है, ”मेरा पानी उतरता देख, मेरे किनारे पर घर मत बसा लेना, मैं समंदर हूं… लौटकर जरूर आऊंगा.”

फडणवीस से उस समय जब ये बातें कही थीं, तब शायद ही किसी ने अंदाजा लगाया होगा कि कुछ वर्षों बाद वही नेता पहले उपChief Minister बनेगा और फिर तीसरी बार राज्य की सत्ता संभालेगा. हालांकि, फडणवीस ने अपने शब्दों को सच साबित कर दिखाया.

22 जुलाई 1970 को नागपुर के एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे देवेंद्र फडणवीस ने छात्र राजनीति से अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़कर उन्होंने संगठनात्मक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई. उन्हें महज 20 वर्ष की उम्र में राम मंदिर आंदोलन के दौरान कारसेवा में भाग लेने के कारण जेल भी जाना पड़ा. यही दौर उनके Political व्यक्तित्व को आकार देने वाला साबित हुआ.

वह 1992 में केवल 22 वर्ष की आयु में नागपुर नगर निगम के सबसे युवा पार्षद बने. इसके बाद 1997 में 27 वर्ष की उम्र में नागपुर के महापौर बने और उस समय देश के सबसे युवा महापौर में उनकी गिनती हुई. महापौर रहते हुए उन्होंने पेंच जल आपूर्ति परियोजना, नगर वित्तीय सुधार और प्रशासनिक पारदर्शिता जैसे फैसलों से अलग पहचान बनाई.

देवेंद्र फडणवीस 1999 में पहली बार विधायक चुने गए. इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा. वह लगातार नागपुर दक्षिण-पश्चिम सीट से जीत दर्ज करते रहे और विधानसभा में प्रभावी उपस्थिति, पकड़ और बेबाक भाषणों के कारण भाजपा के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गए. 2003 में उन्हें विधानसभा के उत्कृष्ट विधायक सम्मान से भी नवाजा गया. साल 2013 में भाजपा ने उन्हें Maharashtra प्रदेश अध्यक्ष बनाया और 2014 के विधानसभा चुनाव की कमान सौंपी. उनके नेतृत्व में भाजपा ने राज्य में पहली बार 122 सीटें जीतकर इतिहास रचा. महज 44 वर्ष की उम्र में 31 अक्टूबर 2014 को देवेंद्र फडणवीस Maharashtra के Chief Minister बने. उनका पहला कार्यकाल विकास, बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक सुधारों के लिए याद किया जाता है.

Chief Minister के रूप में उन्होंने जलयुक्त शिवार अभियान, समृद्धि महामार्ग, Mumbai मेट्रो, नागपुर मेट्रो, पुणे मेट्रो, Mumbai ट्रांस हार्बर लिंक, तटीय सड़क जैसी कई बड़ी परियोजनाओं को गति दी. किसानों की कर्जमाफी, मराठा आरक्षण और औद्योगिक निवेश जैसे विषयों पर उनकी Government लगातार चर्चा में रही. उनका कार्यकाल Maharashtra में विकास के नए दौर की शुरुआत था, जबकि विपक्ष ने कई मुद्दों पर Government की आलोचना भी की.

2019 का विधानसभा चुनाव जीतने के बावजूद भाजपा सत्ता से दूर हो गई, जब शिवसेना (उस समय पार्टी एक ही थी) ने कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर महा विकास अघाड़ी Government बना ली. इससे पहले देवेंद्र फडणवीस ने 23 नवंबर 2019 को दूसरी बार Chief Minister पद की शपथ ली, लेकिन यह Government महज तीन दिन ही चल सकी. इसके बाद फडणवीस विपक्ष के नेता बने और विधानसभा में अपने उसी ऐतिहासिक भाषण में कहा, ‘मैं समंदर हूं… लौटकर जरूर आऊंगा.’

देखते ही देखते Political घटनाक्रम बदला. 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना में बगावत हुई और महा विकास अघाड़ी Government गिर गई. इसके बाद फडणवीस ने Chief Minister बनने के बजाय उपChief Minister का पद स्वीकार किया. इसे उनकी Political परिपक्वता और संगठन के प्रति प्रतिबद्धता के रूप में देखा गया. बाद में 2024 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उनके नेतृत्व में 132 सीटों के साथ ऐतिहासिक जीत दर्ज की. इसके बाद 5 दिसंबर 2024 को देवेंद्र फडणवीस ने तीसरी बार Maharashtra के Chief Minister पद की शपथ ली. इस तरह उनका ‘सत्ता में लौटकर आने’ का दावा पूरी तरह सच साबित हुआ.

देवेंद्र फडणवीस अब तक तीन बार Maharashtra के Chief Minister रह चुके हैं. पहला कार्यकाल 31 अक्टूबर 2014 से 12 नवंबर 2019 तक रहा. दूसरा कार्यकाल केवल तीन दिनों का रहा. उन्होंने तीसरी बार 5 दिसंबर 2024 को Chief Minister पद संभाला और वर्तमान में इसी पद पर कार्यरत हैं.

फडणवीस की सबसे बड़ी Political ताकत उनकी संगठन क्षमता, प्रशासनिक अनुभव, साफ-सुथरी छवि, आंकड़ों पर मजबूत पकड़ और विपक्ष के सवालों का तथ्यात्मक जवाब देने की शैली मानी जाती है. छात्र राजनीति से लेकर पार्षद, महापौर, विधायक, प्रदेश अध्यक्ष, Chief Minister , विपक्ष के नेता, उपChief Minister और फिर Chief Minister तक का उनका सफर भारतीय राजनीति में निरंतर संघर्ष और वापसी की एक अनोखी मिसाल है.

/एबीएम