
जिंद, Haryana, 17 जुलाई . रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने Friday को कहा कि हाइड्रोजन ट्रेन, रेलवे को आधुनिक बनाने के पीएम मोदी के विजन का अहम हिस्सा है. इस ट्रेन की तकनीक पूरी तरह से स्वदेशी है और आत्मनिर्भर India का शानदार उदाहरण है.
समाचार एजेंसी से बातचीत में वैष्णव ने कहा कि India में हाइड्रोजन को दुनिया के अन्य हिस्सों की तरह ही एक नए ईंधन के तौर पर देखा जाता है और Government ने इसे बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए गए हैं. रेलवे ने ट्रांसपोर्ट सेक्टर के लिए 2,400 किलोवाट का पूरा हाइड्रोजन प्रोपल्शन सिस्टम तैयार किया है, जिसे इस ट्रेन में लगाया गया है.
उन्होंने आगे कहा कि यह तकनीक पूरी तरह से स्वदेशी है और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की सोच को दर्शाती है. यह ग्रीन एनर्जी की दिशा में एक अहम कदम है. साथ ही, यह Prime Minister मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों से चल रहे रेलवे के आधुनिकीकरण के काम का हिस्सा है.
Union Minister ने आगे कहा कि इस हाइड्रोजन तकनीक के बौद्धिक संपदा (आईपी) अधिकार India के पास ही है और इसे आने वाले समय में निर्यात में भी किया जाएगा. साथ ही कहा कि रेलवे फिलहाल इसे आगे विकसित करने पर कार्य कर रहा है.
रेलवे की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, हाइड्रोजन फ्यूल सेल संचालित ट्रेन का प्रारंभिक संचालन उत्तर रेलवे के जींद-सोनीपत रेलखंड पर किया जाएगा. यह ट्रेन जींद जंक्शन, गोहाना जंक्शन और सोनीपत को जोड़ेगी. साथ ही यह मार्ग के बीच स्थित स्टेशनों और प्रस्तावित ठहरावों पर भी सेवा देगी. इनमें जींद सिटी, पांडू पिंडारा जंक्शन, ललित खेड़ा हॉल्ट, भंभेवा, इसापुर खेड़ी हॉल्ट, बुटाना हॉल्ट, खंडराई हॉल्ट, रभराह हॉल्ट, लाठ हॉल्ट, मोहाना, बरवासनी हॉल्ट और सोनीपत न्यू शामिल हैं.
इसके अतिरिक्त, India में चलने वाली हाइड्रोजन ट्रेन की खासियत यह है कि इसे 10 कोचों वाले यात्री ट्रेनसेट के रूप में तैयार किया है, जिसमें करीब 2,600 यात्रियों को ले जाने की क्षमता है. वहीं, वर्तमान में दुनिया भर में संचालित अधिकांश हाइड्रोजन यात्री ट्रेनों में केवल दो या तीन कोच होते हैं और इन्हें मुख्य रूप से छोटी क्षेत्रीय रेल सेवाओं के लिए इस्तेमाल किया जाता है.
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एबीएस
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