प्राकृतिक खेती से हिमाचल के सेब उत्पादकों को 100 रुपए ‎किलो मिला भाव

शिमला (Shimla) . प्राकृतिक खेती के जरिए पैदा किए गए सेब से हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh)के किसानों को फायदा हुआ है. प्राकृतिक खेती की तकनीक से उनके बाग में पैदा हुए सेबों की इस साल कीमत अप्रत्याशित रूप से 100 रुपए ‎किलो से अधिक रही. एक म‎हिला ‎किसान का कहना है ‎कि जैसे ही स्थानीय बाजार धमंदरी में एक खरीदार ने मेरे बक्सों पर ’प्राकृतिक सेब’ का लेबल देखा, तो उसने तुरंत कहा कि वह इस कीमत पर सारे सेब खरीद लेगा. मैंने 50,000-60,000 रुपए भी बचाए, जो एक बड़ा मुनाफा है. महिला किसान पांच बीघा में सेब के बाग सहित 10 बीघा जमीन पर एसपीएनएफ खेती कर रही है. प्राकृतिक सब्जियों के खरीदार भी उनके पास आते हैं और उन्हें अच्छी कीमत देते हैं. एसपीएनएफ पद्धति देसी गाय के गोबर और मूत्र और कुछ स्थानीय रूप से उपलब्ध संसाधनों से प्राप्त खाद पर आधारित है.

एसपीएनएफ के लिए खाद घर पर तैयार की जा सकती है. प्राकृतिक खेती की तकनीक से आठ बीघा जमीन पर सेब उगाने वाले एक ‎किसान ने तमिलनाडु (Tamil Nadu), गुजरात (Gujarat) और कर्नाटक (Karnataka) जैसे राज्यों में एक सेब का डिब्बा (प्रत्येक में 25 किलो) 4,200-4,500 रुपए में बेचा, जिसमें परिवहन लागत भी शामिल है. हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh)में कृषि और बागवानी फसलों के लिए गैर-रासायनिक कम लागत वाली जलवायु अनुकूल एसपीएनएफ तकनीक को पीके3वाई के तहत बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसे राज्य सरकार (State government) ने 2018 में शुरू किया था. शिमला (Shimla) में राज्य परियोजना कार्यान्वयन इकाई (एसपीआईयू), पीके3वाई द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh)में अब तक 1,33,056 किसान प्राकृतिक खेती कर रहे हैं, जिसमें 7609 हेक्टेयर क्षेत्र शामिल है. इसमें 12,000 सेब के बागवान शामिल हैं.

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