
इंदौर, 14 जुलाई . भोजशाला विवाद मामले में Supreme Court में हुई सुनवाई के बाद हिंदू पक्ष के याचिकाकर्ता आशीष गोयल और उनके अधिवक्ता विनय जोशी ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि Supreme Court ने फिलहाल Madhya Pradesh हाई कोर्ट के 15 मई 2026 के आदेश पर कोई रोक नहीं लगाई है. मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद निर्धारित की गई है. अदालत ने सभी पक्षों को नोटिस जारी करते हुए Friday की नमाज के लिए परिसर के बाहर वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है.
हिंदू पक्ष के याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने से बातचीत में कहा कि Supreme Court में मुस्लिम पक्ष की याचिकाओं पर सुनवाई हुई, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 15 मई को Madhya Pradesh हाई कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश पर किसी प्रकार की रोक नहीं लगाई गई है. हाई कोर्ट ने अपने फैसले में भोजशाला को मां सरस्वती का मंदिर और संस्कृत अध्ययन केंद्र माना था और वही व्यवस्था फिलहाल प्रभावी बनी हुई है. पिछले लगभग दो महीनों से सूर्योदय से सूर्यास्त तक मां वाग्देवी की पूजा-अर्चना लगातार चल रही है और Supreme Court के आदेश के बाद भी यह व्यवस्था पूर्ववत जारी रहेगी. अदालत ने मुस्लिम समाज के लिए एक वैकल्पिक व्यवस्था की है, जिसके तहत प्रत्येक Friday दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक भोजशाला परिसर के बाहर खुली भूमि पर नमाज की व्यवस्था शासन-प्रशासन द्वारा की जाएगी.
उन्होंने यह भी बताया कि Supreme Court ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को निर्देश दिया है कि अंतिम निर्णय आने तक परिसर में किसी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं किया जाएगा. अदालत ने केंद्र Government, एएसआई सहित सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए हैं और तीन सप्ताह बाद मामले की दोबारा सुनवाई होगी. उनके अनुसार संभावना है कि अगली सुनवाई में नियमित और अंतिम बहस की दिशा तय हो सकती है. मुस्लिम पक्ष ने अपनी याचिका में एएसआई द्वारा 98 दिनों तक कराए गए सर्वेक्षण पर आपत्ति जताई है. Supreme Court में दाखिल याचिका में वही तर्क दोहराए गए हैं, जो पहले Madhya Pradesh हाई कोर्ट के समक्ष रखे गए थे और उसमें कोई नया तथ्य सामने नहीं रखा गया है.
वहीं, हिंदू पक्ष के अधिवक्ता विनय जोशी ने कहा कि 15 मई को Madhya Pradesh हाई कोर्ट ने अपने फैसले में भोजशाला को केवल मां सरस्वती का मंदिर माना था और परिसर में नमाज पर रोक लगा दी थी. इसी आदेश को चुनौती देते हुए दूसरा पक्ष Supreme Court पहुंचा, जहां Monday को सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने पक्ष रखा. Supreme Court ने सभी पक्षों को नोटिस जारी किए हैं और नमाज के लिए भोजशाला परिसर के निकट स्थित खाली भूमि पर प्रत्येक Friday दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक वैकल्पिक व्यवस्था करने का निर्देश दिया है.
विनय जोशी ने कहा कि अदालत ने केंद्र Government, Madhya Pradesh Government और मामले से जुड़े अन्य सभी पक्षकारों को नोटिस जारी किए हैं. सुनवाई के दौरान Madhya Pradesh Government की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह भी उपस्थित रहे, जबकि विभिन्न पक्षों की ओर से कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने भी अदालत में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि Supreme Court ने हाई कोर्ट के आदेश पर किसी भी प्रकार की स्टे नहीं दी है. इसलिए फिलहाल Madhya Pradesh हाई कोर्ट का आदेश प्रभावी रहेगा. अब तीन सप्ताह बाद होने वाली अगली सुनवाई में यह तय होगा कि मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ेगी.
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