
रांची, 4 मई . Jharkhand हाईकोर्ट ने चर्चित गैंगस्टर अमन साव के Police एनकाउंटर में मारे जाने की घटना में राज्य Government से सीआईडी की केस डायरी तलब कर ली है. हाईकोर्ट इस मामले पर स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई कर रहा है.
मामले की संवेदनशीलता और एनकाउंटर की सत्यता पर उठ रहे सवालों के बीच कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सच्चाई जानने के लिए केस डायरी का अवलोकन जरूरी है. अब इस मामले की अगली सुनवाई 9 जून को तय की गई है. सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष दो अलग-अलग पक्ष सामने आए.
Police का दावा है अमन साव को जब छत्तीसगढ़ की रायपुर जेल से रांची होटवार जेल लाया जा रहा था, तब उसे छुड़ाने के लिए Police पर हमला हुआ था और इसी दौर अमन भागने की कोशिश कर रहा था. जवाब में Police को एनकाउंटर करना पड़ा.
वहीं दूसरी ओर, अमन साव के परिजनों ने इसे सुनियोजित ‘फर्जी एनकाउंटर’ करार दिया है. अमन साव की मां ने इस पूरे घटनाक्रम को एक साजिश बताते हुए आरोप लगाया है कि Police ने जानबूझकर उनके बेटे की हत्या की है. परिजनों ने मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सीबीआई (जांच की मांग की है. याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत में दलील दी कि Police द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी केवल एनकाउंटर और भागने के एंगल पर केंद्रित है, जबकि परिवार के आरोपों का पहलू पूरी तरह अलग है.
उन्होंने मांग की कि परिवार के आरोपों के आधार पर दूसरी First Information Report दर्ज होनी चाहिए. वकील का आरोप है कि मां द्वारा कराई गई ऑनलाइन First Information Report को अब तक रजिस्टर नहीं किया गया है. दूसरी तरफ, Government की ओर से पक्ष रखते हुए कहा गया कि सीआईडी एक ही केस में सभी बिंदुओं की विस्तृत जांच कर रही है, इसलिए अलग से दूसरी First Information Report दर्ज करने की आवश्यकता नहीं है.
गौरतलब है कि इस मामले में देरी और First Information Report दर्ज न होने को लेकर हाईकोर्ट पहले भी Government को फटकार लगा चुका है. कोर्ट ने पूर्व में सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और प्रक्रिया के तहत First Information Report दर्ज करना अनिवार्य है.
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एसएनसी/एएस
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