
चेन्नई, 7 जुलाई . तमिलनाडु Government जंगलों की सुरक्षा और इंसानों तथा वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष को रोकने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लेने जा रही है. राज्य Government जल्द ही ऐसे हेवी-लिफ्ट ड्रोन तैनात करेगी, जो एक बार में एक टन तक पानी लेकर जंगलों में लगी आग बुझाने में सक्षम होंगे. इसके साथ ही स्मार्ट इलेक्ट्रिक फेंसिंग और सैटेलाइट आधारित निगरानी प्रणाली भी शुरू की जाएगी, ताकि वन्य जीवों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा सके.
राज्य के वन मंत्री आरवी रंजीत कुमार ने बताया कि ये पहल राज्य Government की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत बढ़ते तापमान, लंबे सूखे और जंगलों में आग की बढ़ती घटनाओं जैसी चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटा जाएगा.
उन्होंने बताया कि वन विभाग ने पहले ही ड्रोन आधारित जल छिड़काव प्रणाली तैयार कर ली है. ये हेवी-लिफ्ट ड्रोन आग प्रभावित क्षेत्रों तक तेजी से पहुंचकर बड़ी मात्रा में पानी का छिड़काव कर सकेंगे. खास बात यह है कि ये ड्रोन उन दुर्गम और दूरदराज के जंगलों में भी आसानी से पहुंच सकेंगे, जहां पारंपरिक दमकल वाहन और राहत दल समय पर नहीं पहुंच पाते.
Government का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण राज्य में तापमान लगातार बढ़ रहा है और गर्मियों के दौरान लंबे समय तक सूखा रहने से जंगलों में आग लगने का खतरा भी बढ़ गया है. ऐसे में यह नई तकनीक वन विभाग के लिए काफी मददगार साबित होगी.
इसके अलावा Government मानव और वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए भी तकनीक आधारित कई कदम उठा रही है. इसके तहत स्मार्ट इलेक्ट्रिक फेंसिंग लगाई जाएगी, जिससे हाथियों और अन्य जंगली जानवरों को ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों में प्रवेश करने से रोका जा सकेगा. इससे लोगों पर होने वाले हमलों और किसानों की फसलों को होने वाले नुकसान में भी कमी आने की उम्मीद है.
वन विभाग जंगलों और वन्यजीवों के आवाजाही वाले रास्तों पर सैटेलाइट आधारित कैमरे भी लगाएगा. ये कैमरे जंगली जानवरों की हर गतिविधि पर लगातार नजर रखेंगे और उनकी वास्तविक समय (रियल-टाइम) की जानकारी वन अधिकारियों तक पहुंचाएंगे. इससे अधिकारी समय रहते अलर्ट जारी कर सकेंगे और जानवरों के आबादी वाले इलाकों में पहुंचने से पहले जरूरी कदम उठा सकेंगे.
वन मंत्री के अनुसार, इस तरह की एकीकृत तकनीकी व्यवस्था लागू करने वाला तमिलनाडु देश का पहला राज्य बन सकता है. इस परियोजना का उद्देश्य एक ओर लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, वहीं दूसरी ओर वन्यजीव संरक्षण को भी मजबूत करना और जंगलों के किनारे रहने वाले किसानों को होने वाले नुकसान को कम करना है.
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एएस
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