
New Delhi, 4 दिसंबर . केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने Thursday को New Delhi स्थित विस्तारित संसद भवन एनेक्सी में बिहार के सांसदों के साथ एक उच्च-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की. यह बैठक ‘टीबी मुक्त India अभियान’ के तहत गहन संपर्क अभियान का हिस्सा है. पिछले दो दिनों में उत्तर प्रदेश और Maharashtra के सांसदों के साथ इसी तरह की बैठकों के बाद यह सत्र आयोजित किया गया और आने वाले हफ्तों में टीबी के खिलाफ सामूहिक प्रयासों को मजबूत करने के लिए राज्य-स्तरीय परामर्श की योजना भी बनाई गई है.
बैठक में Union Minister गिरिराज सिंह, राजीव रंजन सिंह, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री राम नाथ ठाकुर, केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री डॉ. राज भूषण चौधरी, केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे और बिहार के सांसद भी उपस्थित रहे.
सभी दलों के Lok Sabha और राज्यसभा सांसदों को एक साथ लाकर ‘टीबी मुक्त India के लिए सांसदों की भागीदारी’ नामक इस कार्यक्रम ने India में टीबी उन्मूलन की दिशा में तेजी से प्रगति करने के लिए एकीकृत Political संकल्प को और मजबूत किया है.
जेपी नड्डा ने अपने संबोधन में टीबी उन्मूलन की दिशा में तेजी से हो रही प्रगति पर प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि देश में 2015 और 2024 के बीच टीबी के मामलों में 21 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है, जो वैश्विक औसत से लगभग दोगुनी है. साथ ही, 90 फीसदी उपचार सफलता दर भी है, जो विश्वव्यापी औसत से अधिक है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि स्क्रीनिंग, सामुदायिक स्तर पर पहुंच और रोगी सहायता की दिशा में हो रही बिहार की महत्वपूर्ण प्रगति, India की राष्ट्रीय तरक्की को और मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगी.
जेपी नड्डा ने सांसदों से टीबी उन्मूलन के राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में सक्रिय नेतृत्व संभालने का आग्रह किया है. उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे जन जागरूकता बढ़ाने, सामाजिक कलंक को कम करने, निक्षय शिविरों व सामुदायिक जाँच के माध्यम से शीघ्र निदान को बढ़ावा देने (खासकर लक्षणहीन संवेदनशील समूहों में), जिला एवं ब्लॉक स्तर पर गुणवत्तापूर्ण टीबी सेवाओं की निगरानी मजबूत करने तथा निक्षय मित्रों को संगठित कर मरीजों को पोषण, मनोवैज्ञानिक सहायता और रोजगार से जुड़ी मदद सुनिश्चित करने में अग्रणी भूमिका निभाएँ. श्री नड्डा ने स्पष्ट किया कि टीबी मुक्त India केवल एक स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामूहिक इच्छाशक्ति और सांसदों जैसे जन-प्रतिनिधियों के सक्रिय Political नेतृत्व से संचालित एक जन-आंदोलन है.
सत्र के दौरान, बिहार के सांसदों ने जागरूकता बढ़ाने, गुणवत्तापूर्ण निदान और रोगी-केंद्रित देखभाल को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई. इसके साथ ही समुदायों को टीबी उन्मूलन के राष्ट्रव्यापी आंदोलन में भाग लेने के लिए भी प्रेरित किया.
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने India की उभरती रणनीति की रूपरेखा पेश की, जिसमें एआई-सक्षम निदान का विस्तार, गहन जांच और बेहतर परिणामों के लिए रोगी सहायता में वृद्धि शामिल है. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की अतिरिक्त सचिव और मिशन निदेशक श्रीमती आराधना Patnaयक ने ‘टीबी मुक्त India अभियान’ के तहत हासिल की गई उपलब्धियों का ब्यौरा पेश किया और उन क्षेत्रों पर भी प्रकाश डाला, जहां संसदीय नेतृत्व बिहार की प्रतिक्रिया को और मजबूत कर सकता है.
यह चर्चा टीबी-मुक्त बिहार और टीबी-मुक्त India की दिशा में Political सहमति और जमीनी स्तर पर रफ्तार तेज करने के मंत्रालय के निरंतर प्रयासों में एक और मील का पत्थर साबित हुई. Prime Minister Narendra Modi के दृष्टिकोण से प्रेरित होकर, बिहार के सांसदों ने टीबी-मुक्त India की दिशा में तेजी से प्रगति लाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई ताकि Political इच्छाशक्ति जमीनी स्तर पर बदलावकारी कार्रवाई में तब्दील हो सके.
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