
Patna, 10 अगस्त . राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने बिहार के Chief Minister सम्राट चौधरी से अपनी मुलाकात को लेकर उठ रही अटकलों पर सफाई दी. उन्होंने कहा कि किसी विधायक या सांसद का अपने क्षेत्र के विकास के लिए Chief Minister से मिलना कोई गलत बात नहीं है. भाई वीरेंद्र ने स्पष्ट किया कि सीएम सम्राट से उनकी मुलाकात करीब पौने दो महीने पहले हुई थी और इसे मौजूदा Political घटनाक्रम से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए.
समाचार एजेंसी से बातचीत में भाई वीरेंद्र ने कहा कि मैं विधायक हूं, Chief Minister तो सबका होता है. हमारे दल के कई विधायक अपने क्षेत्र के विकास के लिए मिले हैं. भाई वीरेंद्र मिला है तो कौन सा गलत काम किया है? उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह लगभग पौने दो महीने पहले Chief Minister से मिले थे. इसलिए उनकी मुलाकात को हाल की घटना मानना सही नहीं है.
राजद विधायक ने कहा कि बिहार के Chief Minister से विधायक या सांसद अपने क्षेत्र की समस्याओं और विकास कार्यों को लेकर मुलाकात कर सकते हैं. Chief Minister किसी एक दल के नहीं, बल्कि पूरे बिहार के Chief Minister होते हैं. Chief Minister से उनकी मुलाकात को Political दल-बदल या किसी अन्य Political संभावना से जोड़ना उचित नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि मुझे कई बार Political रूप से तोड़ने की कोशिश की गई है और कई तरह के अवसर एवं प्रस्ताव भी उनके सामने आए हैं. लेकिन, मैं अपने Political रुख पर कायम हूं.
उन्होंने कहा कि भाई वीरेंद्र को तोड़ने के लिए कुछ लोग लगे हुए हैं. इस तरह के लोग पार्टी में हैं. हमारे नेता सब समझते हैं और हम लोग दृढ़ संकल्पित हैं कि कैसे हमारे नेता तेजस्वी यादव को हम लोग Chief Minister बनाएं. हम लड़ने वाले लोग हैं. हम किसी के खिलाफ बोलेंगे नहीं, हमारा एक ही मोटा है कि कैसे तेजस्वी यादव को बिहार का Chief Minister बनाएं.
राजद विधायक ने आरोप लगाया कि कुछ लोग खुद को Political रूप से मुश्किल स्थिति में पाकर दूसरों को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि कुछ लोगों के खिलाफ जांच या मजिस्ट्रेट चेकिंग जैसी स्थिति बनी है और अब वे अपना बचाव करने के लिए दूसरे मुद्दे खड़े कर रहे हैं. उन्होंने आगे कहा कि कुछ लोग अपने व्यक्तिगत या Political कारणों से भी बदला लेने की कोशिश कर रहे हैं.
राजद विधायक ने Political ऑफर मिलने के सवाल पर भी अपनी स्थिति स्पष्ट की. उन्होंने कहा कि उन्हें पहले भी कई तरह के प्रस्ताव मिले हैं, जिनमें Lok Sabha चुनाव लड़ने जैसे प्रस्ताव भी शामिल रहे हैं, लेकिन उन्होंने इन्हें स्वीकार नहीं किया.
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