
साबरकांठा, 24 जुलाई . Gujarat के साबरकांठा जिले में एक 75 साल के बुज़ुर्ग दपंति को “डिजिटल अरेस्ट” स्कैम का शिकार होने से बचाया गया. वे साइबर ठगों को 25 तोला सोना और दो लाख रुपये नकद सौंपने ही वाले थे, तभी बैंक के एक सतर्क कर्मचारी ने चेतावनी दी और Police ने समय रहते दखल दिया.
साबरकांठा साइबर क्राइम Police के अनुसार, धोखाधड़ी करने वालों ने Mumbai Police के अधिकारी बनकर यह झूठा दावा किया कि रसिकभाई मोदी के आधार कार्ड से जुड़े सिम कार्ड का इस्तेमाल “नरेश गोयल” नाम के व्यक्ति से जुड़े एक वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में किया गया था.
धोखाधड़ी करने वालों ने लगातार वीडियो कॉल के जरिए बुजुर्ग दंपति को “डिजिटल अरेस्ट” में रखा और कानूनी कार्रवाई की धमकी दी.
Police ने बताया कि इसके बाद साइबर ठगों ने कथित मामले से जोड़े का नाम हटाने के बदले पैसे की मांग की. पीड़ितों को कथित तौर पर निर्देश दिया गया कि वे पैसे का इंतजाम करने के लिए 25 तोला सोना पिघलाकर सोने के बिस्कुट बनवाएं और दो लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट तुड़वाएं.
धोखाधड़ी की कोशिश का पता तब चला जब बुजुर्ग दंपत्ति पैसे का इंतजाम करने के लिए एक्सिस बैंक की एक शाखा में गए.
बैंक के एक कर्मचारी ने देखा कि बुजुर्ग दंपत्ति परेशान लग रहे थे. कुछ गड़बड़ होने का शक होने पर उन्होंने तुरंत साबरकांठा साइबर क्राइम Police को इसकी सूचना दी.
इसके कुछ ही देर बाद साइबर क्राइम की एक टीम बैंक पहुंची. उन्होंने दंपति को समझाया और बताया कि वे साइबर धोखाधड़ी का शिकार हो गए हैं.
Police ने बताया कि समय पर दखल देने से पीड़ित अपने पैसे और सोने को गंवाने से बच गए, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान नहीं हुआ.
यह मामला “डिजिटल अरेस्ट” स्कैम को लेकर बढ़ती चिंता के बीच सामने आया है. इन स्कैम में धोखेबाज कानून लागू करने वाली एजेंसियों या सरकारी अधिकारियों का रूप धरते हैं और पीड़ितों को डरा-धमकाकर पैसे या कीमती सामान ट्रांसफर करवाने के लिए झूठे आपराधिक आरोप लगाते हैं.
उप Chief Minister हर्ष संघवी ने Police को निर्देश दिया है कि वे उन नागरिकों को तुरंत मदद पहुंचाएं, जिनके साइबर धोखाधड़ी का शिकार होने का खतरा है. उन्होंने हाल ही में वरिष्ठ Police और बैंक अधिकारियों के साथ एक समीक्षा बैठक की थी. इसका मकसद आपसी तालमेल को बेहतर बनाना और ऐसे उपाय लागू करना था जिनसे वित्तीय धोखाधड़ी को रोका जा सके और ऐसे मामलों में बेहतर कार्रवाई की जा सके.
Police ने लोगों से सतर्क रहने की अपील करते हुए फिर से कहा कि कोई भी Police बल या सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल के जरिए जांच नहीं करती है और न ही आपराधिक मामलों को सुलझाने के लिए पैसे की मांग करती है.
उन्होंने नागरिकों, खासकर बुज़ुर्गों से कहा कि वे ऐसी फोन कॉल्स पर भरोसा न करें. अगर उन्हें धोखाधड़ी की ऐसी कोई कोशिश दिखे, तो वे तुरंत ‘1930’ पर साइबर क्राइम हेल्पलाइन से संपर्क करें या नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के ज़रिए इसकी रिपोर्ट करें.
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ओपी/पीएम
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