
गांधीनगर, 28 जून . महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण को आत्मनिर्भर India की मजबूत नींव मानते हुए केंद्र Government पिछले 12 साल से विभिन्न योजनाओं के माध्यम से महिला वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दे रही है. Prime Minister Narendra Modi के नेतृत्व में ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से चलाई जा रही ‘लखपति दीदी योजना’ Gujarat में उल्लेखनीय सफलता हासिल कर रही है. राज्य में अब तक करीब 6 लाख महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं, जिन्होंने स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से अपनी आय बढ़ाकर आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की है.
इसी कड़ी में नवसारी जिले की चिखली तालुका के नोगामा गांव की भावनाबेन पटेल सफलता की प्रेरणादायक कहानी बनकर उभरी हैं. गायत्री सखी मंडल से जुड़ी भावनाबेन ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और Gujarat Government की ‘मिशन मंगलम’ पहल के तहत सरकारी सहायता प्राप्त कर कैंटीन और कैटरिंग व्यवसाय की शुरुआत की. Government से मिले सहयोग के बाद शुरू हुआ यह उद्यम आज न केवल सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है, बल्कि उनके समूह की महिलाओं के लिए स्थायी आय का माध्यम भी बन चुका है. वर्तमान में उनका समूह सालाना 10 लाख रुपए से अधिक की आय अर्जित कर रहा है.
भावनाबेन पटेल ने बताया कि उनका गायत्री सखी मंडल दस महिलाओं का समूह है और पिछले तीन वर्षों से जिला पंचायत में कैंटीन का संचालन कर रहा है. Government से मिली 10 लाख रुपए की सहायता से हमने यह कैंटीन शुरू की थी. आज हमारी सभी दस बहनें आत्मनिर्भर बन चुकी हैं. इसके लिए मैं Government और जीएलपीसी का दिल से धन्यवाद करती हूं.
इसी तरह, आणंद जिले के गामडी गांव की कोमलबेन चौहान भी लखपति दीदी योजना के जरिए आत्मनिर्भरता की मिसाल बन चुकी हैं. उन्होंने मिशन मंगलम के अंतर्गत ‘आस्था सखी मंडल’ की स्थापना की और मिट्टी के दीये, गणपति प्रतिमाएं, पैचवर्क, तोरण, बेडशीट तथा अन्य हस्तशिल्प उत्पादों का निर्माण शुरू किया. शुरुआत में केवल 10 महिलाओं के साथ शुरू हुआ यह समूह आज 60 से अधिक महिलाओं को रोजगार और आय का अवसर उपलब्ध करा रहा है. कोमलबेन चौहान ने बताया कि उन्होंने मई 2014 में इस समूह की शुरुआत की थी. उस समय केवल 10 बहनें थीं, लेकिन अब 60 से 70 महिलाएं हमारे साथ जुड़ चुकी हैं. आज लोग मुझे ‘लखपति दीदी’ कहकर बुलाते हैं. यह मेरे लिए गर्व की बात है कि इस योजना ने मुझे नई पहचान दी है.
आस्था सखी मंडल की सदस्य रेखाबेन ने बताया कि वह पिछले दस वर्षों से इस समूह से जुड़ी हैं. पहले वे घर पर कोई आय अर्जित नहीं करती थीं, लेकिन समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने विभिन्न उत्पाद बनाना शुरू किया. आज वे अपने परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं और अपने पैरों पर खड़ी हैं. समूह की एक अन्य सदस्य रश्मिबेन ने बताया कि उन्होंने Government की ओर से पैचवर्क, टेराकोटा, टेडी बियर और खिलौना निर्माण जैसी कई प्रशिक्षण प्राप्त किए हैं. इन कौशलों के माध्यम से वे हर महीने लगभग 7 हजार रुपए तक की आय अर्जित कर रही हैं. Government से मिलने वाले प्रशिक्षण और सहयोग ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया है.
गौरतलब है कि लखपति दीदी योजना ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा संचालित दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत संचालित की जा रही है. इस योजना के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) से जुड़ी महिलाओं को तकनीकी प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, ऋण सुविधा और अपने उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध कराया जाता है. जिन महिलाओं की वार्षिक आय एक लाख रुपए से अधिक हो जाती है, उन्हें ‘लखपति दीदी’ के रूप में मान्यता दी जाती है. मौजूदा समय में देशभर में 3 करोड़ से अधिक महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं. करीब 6 लाख लखपति दीदियों के साथ Gujarat इस योजना के सफल क्रियान्वयन में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है.
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