
गांधीनगर, 10 अगस्त . Gujarat की महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. मनीषा वकील ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि कुपोषित बच्चों के पूरी तरह स्वस्थ होने तक उनकी लगातार निगरानी की जाए. यह निर्देश गांधीनगर में आयोजित ‘3,300 प्लस बाल-अनुकूल आंगनबाड़ी एवं पोषण संगम स्वास्थ्य शिविर’ विषय पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला में दिए गए.
कार्यशाला में आंगनबाड़ी केंद्रों के बुनियादी ढांचे के विकास और बच्चों की प्रारंभिक देखभाल संबंधी योजनाओं पर चर्चा की गई. डॉ. वकील ने कहा कि आंगनबाड़ी केवल पोषण प्रदान करने का केंद्र नहीं है, बल्कि बच्चों के समग्र विकास की पहली सीढ़ी और शिक्षा का वास्तविक मंदिर है.
उन्होंने कहा कि नए बनने वाले 600 से 900 वर्ग फुट क्षेत्रफल वाले आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के लिए सुरक्षित और अनुकूल वातावरण होना चाहिए. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बच्चे के जीवन के पहले छह वर्ष उसके विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं, इसलिए आंगनबाड़ी का माहौल खेल, सीखने और गतिविधियों को बढ़ावा देने वाला होना चाहिए.
मंत्री ने निर्देश दिया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को आधुनिक शिक्षण पद्धतियों तथा फ्लोर गेम्स, चित्रकला और बाल गीत जैसी नवाचारी गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया जाए. उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी स्तर पर कुपोषित बच्चों के लिए विशेष स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाएंगे.
डॉ. वकील ने स्पष्ट किया कि केवल स्वास्थ्य जांच या दवा देने से काम नहीं चलेगा. अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि कुपोषित बच्चों की नियमित रूप से निगरानी की जाए और उनके स्वस्थ होने तक फॉलोअप जारी रखा जाए. उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों के माता-पिता से संपर्क कर उन्हें उचित पोषण संबंधी मार्गदर्शन दिया जाए.
प्रस्तावित ‘पोषण संगम स्वास्थ्य शिविर’ के तहत स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग मिलकर काम करेंगे. मंत्री ने ‘ममता दिवस’ के दौरान भी ऐसी व्यवस्था करने को कहा, जिससे आशा और आंगनबाड़ी वर्कर्स एक ही स्थान पर गर्भवती महिलाओं, किशोरियों और बच्चों का वजन, लंबाई मापने और टीकाकरण जैसी गतिविधियां समन्वय के साथ कर सकें.
महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव डॉ. राकेश शंकर ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्रों के ढांचागत विकास के लिए समेकित बाल विकास सेवा और सड़क एवं भवन विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हुआ है. उन्होंने कहा कि दोनों विभागों के संयुक्त प्रयास से 3,300 से अधिक नए आंगनबाड़ी केंद्र विकसित किए जा रहे हैं, जबकि सड़क एवं भवन विभाग द्वारा टेंडर जारी किए गए 1,507 आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण भी जारी है.
उन्होंने बताया कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए आईआईटी गांधीनगर के विशेषज्ञों की सेवाएं ली जा रही हैं. साथ ही तीसरे पक्ष द्वारा निरीक्षण और गुणवत्ता मानकों का पालन कर ‘स्मार्ट आंगनबाड़ी’ की परिकल्पना को साकार किया जा रहा है.
कार्यशाला में यूनिसेफ ने बच्चों के अनुकूल, सुरक्षित और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखकर तैयार किए गए स्मार्ट आंगनबाड़ी केंद्रों के डिजाइन और 3-डी मॉडल प्रस्तुत किए. वहीं, आईआईटी गांधीनगर के विशेषज्ञों ने निर्माण गुणवत्ता बनाए रखने के लिए थर्ड पार्टी निरीक्षण संबंधी मार्गदर्शन दिया.
कार्यक्रम में सड़क एवं भवन विभाग के सचिव, आईसीडीएस आयुक्त, स्वास्थ्य आयुक्त और अन्य अधिकारियों ने ‘पोषण संगम स्वास्थ्य शिविर’ की नीति, दिशा-निर्देशों और कार्यान्वयन योजना पर विस्तार से जानकारी दी. इस दौरान आंगनबाड़ी क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशंसा प्रमाण पत्र भी प्रदान किए गए.
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एएमटी/डीकेपी
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