मिष्टी योजना में अग्रणी गुजरात, मैंग्रोव संरक्षण और विस्तार का बना राष्ट्रीय मॉडल

जामनगर, 30 जुलाई . तटीय पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने की दिशा में Gujarat देश का अग्रणी राज्य बनकर उभरा है. Chief Minister भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में केंद्र Government की मिष्टी योजना के तहत राज्य मैंग्रोव संरक्षण और विस्तार का राष्ट्रीय मॉडल बनकर सामने आया है.

Government के सतत प्रयासों की बदौलत पिछले तीन वर्षों में करीब 40 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में मैंग्रोव प्लांटेशन और पुनर्स्थापन किया गया है.

डॉ. जयपाल सिंह, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) Gujarat, ने कहा कि इस प्रोग्राम के तहत बहुत अच्छा काम हुआ है और India में सालभर में हुए कुल काम का लगभग 85 प्रतिशत Gujarat राज्य में हुआ है और पिछले तीन सालों में हमने वन विभाग के जरिए 40,000 हेक्टेयर से ज्यादा एरिया में मैंग्रोव प्लांटेशन पूरा किया है.

मैंग्रोव तटीय इलाकों के लिए प्राकृतिक सुरक्षा कवच हैं. ये समुद्री जैव विविधता को समृद्ध करते हैं, मत्स्य उत्पादन बढ़ाते हैं और तटीय समुदायों की आजीविका के साथ ब्लू इकोनॉमी को भी मजबूती देते हैं.

जामनगर के किसान डीएम दाफदा ने बताया कि जब मैंग्रोव के पत्ते पीले पड़कर नीचे गिर जाते हैं तो उनसे उगने वाले कीड़े छोटी मछलियों के आहार बनते हैं, जो एक जीव का खाना होता है. यही छोटी मछली से लेकर बड़ी मछली तक की सारी फूड चेन बनती है.

Gujarat देश का दूसरा सबसे बड़ा मैंग्रोव कवर वाला राज्य है. Gujarat के तटीय क्षेत्रों में India के कुल मैंग्रोव आवरण का लगभग 23.32 प्रतिशत हिस्सा है. राज्य Government ने वर्ष 2035 तक मैंग्रोव क्षेत्र को लगभग 1,164 वर्ग किलोमीटर से बढ़ाकर 1,500 वर्ग किलोमीटर करने का लक्ष्य रखा है.

बताते चलें कि हर साल 26 जुलाई को मनाए जाने वाले वर्ल्ड मैंग्रोव डे हमें याद दिलाता है कि वेटलैंड इकोसिस्टम के लिए इनका कितना ज्यादा महत्व है. जाहिर है कि Gujarat आज सिर्फ मैंग्रोव के प्लांटेशन तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके वैज्ञानिक संरक्षण और दीर्घकालिक विकास पर भी विशेष फोकस कर रहा है.

Gujarat का मॉडल यह साबित करता है कि Government, वैज्ञानिकों और स्थानीय समुदायों की साझेदारी से पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन से मुकाबला और तटीय विकास, तीनों लक्ष्यों को एक साथ हासिल किया जा सकता है.

डीकेएम/एबीएम