गुजरात : बनास डेयरी बन रही है भारत की दुग्ध क्रांति की मजबूत नींव; पशुपालक हुए आत्मनिर्भर

बनासकांठा, 1 जून . विश्व दुग्ध दिवस पर बनास डेयरी के पशुपालकों में उत्साह देखा गया. देश के सबसे बड़े दुग्ध उत्पादक सहकारी संगठनों में शामिल बनास डेयरी पशुपालकों और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने में अग्रणी भूमिका निभा रही है. Prime Minister Narendra Modi के आत्मनिर्भर India के सपने को बनास डेयरी जमीन पर उतार रही है.

बनासकांठा की बनास डेयरी आज न सिर्फ Gujarat बल्कि पूरे देश में दूध उत्पादन का प्रमुख केंद्र बन चुकी है. यहां के पशुपालक दूध बेचकर अपनी आय दोगुनी कर रहे हैं. साथ ही गोबर से बनी गोबर गैस और ऑर्गेनिक खाद के जरिए केमिकल खाद पर निर्भरता कम हो रही है. किसान ऑर्गेनिक खेती कर अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं.

महिला पशुपालक नयनाबेन चौधरी ने से बात करते हुए कहा, “Government ने पशुपालकों को भी किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा दी है. पहले नया पशु खरीदने या चारे के लिए ऊंचे ब्याज पर कर्ज लेना पड़ता था. अब आसानी से लोन मिल जाता है. पहले दूध का पैसा मिलने में हफ्तों लग जाते थे, लेकिन अब डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर से पैसा सीधे अकाउंट में आ जाता है. बनास डेयरी से बोनस भी मिलता है. पशु बीमा योजना के तहत अगर कोई नुकसान होता है तो मुआवजा भी तुरंत मिल जाता है.”

बनास डेयरी के चेयरमैन शंकर चौधरी ने विश्व दुग्ध दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा, “India विश्व का सबसे बड़ा डेयरी देश बनने जा रहा है. दुनिया में सबसे ज्यादा गाय-भैंस India में हैं. केंद्र Government का डेयरी क्षेत्र पर पूरा फोकस है, जिसकी वजह से यह इंडस्ट्री तेजी से आगे बढ़ रही है. आने वाले समय में और बड़ी संभावनाएं हैं.”

शंकर चौधरी ने आगे कहा, “बनास डेयरी प्रतिदिन 40 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि दुग्ध उत्पादक महिलाओं और पशुपालकों के बैंक खातों में जमा करवाती है. यह राज्य और केंद्र Government की सकारात्मक नीतियों और सहकारिता के सही दृष्टिकोण का नतीजा है.”

उन्होंने Prime Minister Narendra Modi और सहकारिता मंत्री अमित शाह का विशेष आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा, “पीएम मोदी और अमित शाह जी ने डेयरी इंडस्ट्री को आगे बढ़ाने के लिए जो ठोस कदम उठाए हैं, उसके लिए हम सब उनके आभारी हैं.”

बनास डेयरी के माध्यम से पशुपालकों को न सिर्फ दूध का उचित मूल्य मिल रहा है, बल्कि आधुनिक पशुपालन प्रशिक्षण, उन्नत नस्लों की उपलब्धता, चारे की बेहतर व्यवस्था और विपणन सुविधा भी मिल रही है. इससे ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है. कई महिला स्वयं सहायता समूह डेयरी से जुड़कर अपनी आजीविका चला रहे हैं.

1 जून को विश्व दुग्ध दिवस पर बनास डेयरी के पशुपालकों ने डेयरी को धन्यवाद दिया और Prime Minister के विजन को पूरा करने का संकल्प लिया. बनास डेयरी अब न सिर्फ दूध उत्पादन, बल्कि पशुपालन-आधारित समग्र विकास का प्रतीक बन गई है.

देश में दूध उत्पादन लगातार बढ़ रहा है और बनास डेयरी इसमें अग्रणी भूमिका निभा रही है. Government की योजनाओं, किसान क्रेडिट कार्ड, पशु बीमा, डायरेक्ट लाभ हस्तांतरण, से पशुपालक अब आत्मनिर्भरता की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं.

एससीएच/एएस