
Ahmedabad, 29 जुलाई . बढ़ती आबादी, घटता भूजल स्तर और बड़ी मात्रा में बारिश का पानी व्यर्थ बह जाना, आज देश के लगभग हर शहर के सामने ये बड़ी चुनौतियां हैं. ऐसे में जल संरक्षण सिर्फ पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि भविष्य की जरूरत बन चुका है. इसी सोच के साथ Ahmedabad नगर निगम ने बड़ी पहल की है.
‘कैच द रेन’ अभियान के तहत बारिश की हर बूंद को सहेजने के मकसद से Ahmedabad नगर निगम ने ‘सुजलाम सुफलाम जल अभियान’ के अंतर्गत शहर की 41 झीलों और तालाबों को इंटरलिंक करने का नेटवर्क तैयार किया है.
इस व्यवस्था के तहत एक तालाब के भरने पर उसका अतिरिक्त पानी पाइपलाइन के जरिए दूसरे तालाब में पहुंच जाएगा.
इस परियोजना से Ahmedabad की वर्षा जल भंडारण क्षमता में लाखों क्यूबिक फीट की वृद्धि हुई है, जिससे भविष्य में शहरवासियों के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ेगी.
Ahmedabad नगर निगम के चीफ इंजीनियर राकेश बोडीवाला ने कहा कि हमने Ahmedabad म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (एएमसी) में 41 झीलों को पहले ही आपस में जोड़ दिया है, बाकी 32 झीलों को जोड़ने का काम चल रहा है और हमने 17 झीलों का प्लान बनाया है. अब इसे आपस में जोड़ने से जब अलग-अलग झील का पानी भर जाएगा तो उसका पानी दूसरी झील में ट्रांसफर हो जाएगा. इससे ग्राउंड वाटर लेवल सही तरीके से रिचार्ज हो जाएगा और जलसंकट से निजात मिलेगी.
इंटरलिंकिंग परियोजना सिर्फ जल संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शहरी जल प्रबंधन को भी मजबूत करेगी. इतना ही नहीं, इससे शहर में जलभराव कम होगा और बारिश के पानी की बर्बादी रुकेगी, साथ ही भूजल स्तर को बनाए रखने में भी मदद मिलेगी. बारिश के मौसम में पानी से लबालब भरने वाले ये तालाब शहरवासियों के लिए घूमने और मनोरंजन के प्रमुख केंद्र भी बनेंगे.
एएमसी के नगर आयुक्त बंछानिधि पाणि ने कहा, “केंद्र और Gujarat Government की मदद से यह इंटरलिंकिंग स्कीम अभी लागू हो रही है. अभी इस पानी को स्टोर करके ग्राउंड लेवल के नीचे का पानी रिचार्ज किया जा रहा है और हमारे लिए भूजल स्तर बहुत ज्यादा नीचे नहीं है.”
Ahmedabad में तालाबों और झीलों की इंटरलिंकिंग को सिर्फ एक इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि भविष्य में शहर की जल सुरक्षा का ब्लूप्रिंट भी माना जा रहा है. जाहिर है कि Chief Minister भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में Gujarat Government जल संरक्षण और सतत शहरी विकास पर लगातार जोर दे रही है. ऐसे में Ahmedabad का यह मॉडल आने वाले समय में राज्य और देश के दूसरे शहरों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है.
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डीकेएम/एबीएम
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