
सूरत, 17 जुलाई . सूरत शहर साइबर क्राइम सेल ने Friday को एक अंतरराज्यीय साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया.
इन पर फर्जी शेयर बाजार ट्रेडिंग और निवेश योजना के जरिए एक निवासी से 26.20 लाख रुपए की धोखाधड़ी करने का आरोप है. जांचकर्ताओं ने पाया कि धोखाधड़ी में इस्तेमाल किया गया बैंक खाता India भर में 149 साइबर अपराध शिकायतों और 6.53 करोड़ रुपए से अधिक के संदिग्ध लेनदेन से जुड़ा हुआ है.
अधिकारियों के अनुसार, धोखाधड़ी तब शुरू हुई जब शिकायतकर्ता को एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा गया, जहां आरोपियों ने शेयर बाजार ट्रेडिंग के कथित टिप्स साझा किए और दावा किया कि उनके एप्लिकेशन के माध्यम से ट्रेडिंग करने से अच्छा मुनाफा होगा.
पीड़ित को एक फर्जी ट्रेडिंग वेबसाइट का लिंक भेजा गया और खाता बनाने के लिए कहा गया. आरोपियों ने कथित तौर पर शिकायतकर्ता को शेयर बाजार ट्रेडिंग और निवेश के लिए कई बैंक खातों में कुल 26.20 लाख रुपए ट्रांसफर करने के लिए राजी किया.
लेकिन पैसा कभी वापस नहीं किया गया, जिसके बाद शिकायतकर्ता ने राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन, 1930 के माध्यम से मामले की रिपोर्ट की.
शिकायत के आधार पर, साइबर क्राइम सेल ने भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 318(4), 336(2), 338, 336(3), 340(2), 61(2) और 3(5) के साथ-साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2008 की धारा 66(डी) के तहत First Information Report दर्ज की.
सहायक Police आयुक्त (साइबर क्राइम) एसई डेनियल ने जांच का पर्यवेक्षण किया, जबकि Police इंस्पेक्टर वीडी मंडोरा ने उस टीम का नेतृत्व किया जिसने तकनीकी विश्लेषण, वित्तीय लेन-देन की जांच, डिजिटल साक्ष्य और अंतरराज्यीय समन्वय के माध्यम से आरोपियों का पता लगाया.
Police ने Odisha और पश्चिम बंगाल से पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया.
उनकी पहचान Odisha के सुंदरगढ़ जिले के रंजन उर्फ सुनील (33), झारसुगुड़ा जिले के कृष्ण कुम्हार उर्फ किशन (54), गजपति जिले के सुभाषचंद्र (52), एसके पश्चिम बंगाल के पुरबा बर्धमान जिले के निवासी 41 वर्षीय आलमगीर और पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के निवासी 45 वर्षीय बसंतसिंह उर्फ सिंहसर उर्फ बिग बॉस.
जांचकर्ताओं ने बताया कि रंजन और कृष्णा ने संयुक्त रूप से ‘आरआरके पब्लिकबाजार प्राइवेट लिमिटेड’ के नाम से एक्सिस बैंक में एक चालू खाता खोला था.
Police के अनुसार, उन्होंने कमीशन के बदले सुभाषचंद्र और आलमगीर को खाता किराए पर दिया था.
आरोप है कि इन दोनों ने कमीशन के बदले बैंक खाता किट बसंतसिंह को सौंप दी, जिसने फिर इसे साइबर धोखाधड़ी को अंजाम देने के लिए गिरोह के फरार सदस्यों को मुहैया कराया.
Police ने बताया कि आरोपियों ने खाताधारकों के साथ मिलकर साइबर धोखाधड़ी से प्राप्त धन को आईएमपीएस और आरटीजीएस के माध्यम से नेट बैंकिंग द्वारा फरार साजिशकर्ताओं को हस्तांतरित किया.
वर्तमान मामले में, जांचकर्ताओं ने पाया कि शिकायतकर्ता की धोखाधड़ी से प्राप्त 50,000 रुपए की राशि इस खाते के माध्यम से भेजी गई थी.
Police को यह भी पता चला कि 1 मार्च, 2025 और 28 फरवरी, 2026 के बीच खाते के माध्यम से कुल 6,53,43,924 रुपए के संदिग्ध साइबर-धोखाधड़ी लेनदेन किए गए थे.
–
एमएस/
Skip to content