तृणमूल में बढ़ता असंतोष संगठन की गहरी समस्याओं का संकेत : शताब्दी रॉय (आईएएनएस एक्सक्लूसिव)

कोलकाता, 10 जून . तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में बढ़ते असंतोष के बीच पार्टी की बागी सांसद शताब्दी रॉय ने संगठन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी नेतृत्व ने आंतरिक शिकायतों को नजरअंदाज किया, चुनावी हार की समीक्षा नहीं की और भ्रष्टाचार व अति-आत्मविश्वास को संगठन को कमजोर करने दिया गया.

शताब्दी रॉय ने से विशेष बातचीत में कहा कि पार्टी छोड़ने या विद्रोह करने वाले नेताओं की बढ़ती संख्या को केवल व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा का परिणाम नहीं माना जा सकता, बल्कि यह संगठन के भीतर गहरी समस्याओं का संकेत है.

उन्होंने कहा, “इतने सारे लोग पार्टी छोड़ चुके हैं या असंतुष्ट हैं. इसे केवल उनकी व्यक्तिगत गलती नहीं कहा जा सकता. जब बड़ी संख्या में लोग नाराज हों, तो इसकी जिम्मेदारी पार्टी पर भी आती है. पार्टी को अपने कार्यकर्ताओं और नेताओं का ध्यान रखना चाहिए था.”

रॉय ने कहा कि पार्टी की सबसे बड़ी कमियों में से एक चुनावी हार के कारणों की समीक्षा न करना है. उन्होंने कहा, “हार के बाद कभी गंभीर चर्चा नहीं हुई कि हम क्यों हारे. जब तक हार के कारणों का विश्लेषण नहीं होगा, गलतियों को सुधारा नहीं जा सकता. हर संगठन अपनी असफलताओं की समीक्षा करता है, Political दलों को भी ऐसा करना चाहिए.”

भ्रष्टाचार के मुद्दे पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर भ्रष्टाचार का स्तर चिंताजनक रूप से बढ़ गया है. किसी ने कल्पना नहीं की थी कि भ्रष्टाचार इस स्तर तक पहुंच जाएगा. जो बातें अब सामने आ रही हैं, वे चौंकाने वाली हैं. पार्टी को इन मुद्दों पर गंभीरता से कार्रवाई करनी चाहिए.”

उन्होंने सवाल उठाया कि क्या पार्टी और Government को जमीनी स्तर पर हो रही गतिविधियों की जानकारी नहीं थी. अगर Government और पार्टी को इन घटनाओं की जानकारी नहीं थी, तो यह भी एक बड़ी विफलता है और यदि जानकारी थी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई, तो जवाबदेही पर सवाल उठना स्वाभाविक है.

पार्टी की वर्तमान स्थिति के लिए जिम्मेदार कारणों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार, अति-आत्मविश्वास, आई-पैक का बढ़ता प्रभाव और पुराने कार्यकर्ताओं की उपेक्षा प्रमुख कारण हैं.

उन्होंने कहा, “यह धारणा बन गई थी कि लोग हर हाल में हमें वोट देंगे. इसके अलावा, लंबे समय से ममता बनर्जी के साथ जुड़े कार्यकर्ताओं और नेताओं की अनदेखी की गई. अनुभवी Political कार्यकर्ताओं की बात नहीं सुनना भी एक बड़ी गलती थी.”

शताब्दी रॉय ने Political सलाहकारों और डेटा आधारित रणनीतियों पर अत्यधिक निर्भरता की भी आलोचना की. उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ता स्थानीय परिस्थितियों और लोगों की भावनाओं को बेहतर समझते हैं. टिकट वितरण और Political रणनीति स्थानीय नेताओं से सलाह लेकर तय की जानी चाहिए. फैसले केवल बाहरी सलाहकारों के आधार पर नहीं होने चाहिए.

ममता बनर्जी की भूमिका पर टिप्पणी करते हुए शताब्दी रॉय ने कहा कि उन्हें महत्वपूर्ण Political निर्णयों पर अधिक नियंत्रण बनाए रखना चाहिए था. ममता बनर्जी देश की सबसे अनुभवी और प्रभावशाली नेताओं में से एक हैं. उन्हें सभी जिम्मेदारियां अभिषेक बनर्जी को नहीं सौंपनी चाहिए थीं. वहीं अभिषेक को भी सब कुछ सलाहकारों के भरोसे नहीं छोड़ना चाहिए था.

हाल के घटनाक्रमों पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि जब कोई पार्टी कठिन दौर से गुजर रही होती है, तब छोटी-छोटी गलतियां भी बड़े विवाद का कारण बन सकती हैं. इसलिए नेतृत्व को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है.

उन्होंने भविष्य की Political संभावनाओं पर कहा कि अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है. विभिन्न समूह अलग-अलग स्तर पर काम कर रहे हैं और चर्चाएं जारी हैं.

इस दौरान शताब्दी रॉय ने मौजूदा भाजपा Government की कुछ योजनाओं की सराहना भी की. उन्होंने कहा, “यह उत्साहजनक है कि चुनावी वादों को लागू करने की दिशा में काम शुरू हो गया है. मुफ्त बस सेवा और अन्नपूर्णा योजना जैसी पहलें शुरू हो चुकी हैं. उम्मीद है कि Government आगे भी अपने वादों को पूरा करने और सुशासन पर ध्यान देती रहेगी.”

एबीएम