सरकार को सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना चाहिए : मंत्री संजय निषाद

नोएडा, 18 अगस्त . उत्तर प्रदेश Government में मंत्री संजय निषाद ने ओबीसी आरक्षण, संवैधानिक अधिकारों और महिलाओं तथा निषाद समुदाय के लिए पर्याप्त प्रतिनिधित्व की मांग करते हुए कहा कि Government को सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना चाहिए.

उन्होंने Tuesday को समाचार एजेंसी से बातचीत में कहा कि स्थापना दिवस पर हमने दलील के साथ अपील की है. हमारे पास बाकायदा इस बात के सबूत है कि हमने आजादी की लड़ाई में अहम योगदान दिया. हमने संविधान बनवाने में भी अहम योगदान दिया है. संविधान बनवाने में भी केवट, मल्लाह और माझी को शामिल किया गया है. हमारा नाम ओबीसी समुदाय में शामिल किया जाना चाहिए.

मंत्री के मुताबिक, जब हमने साल 2016 में इस संबंध में आंदोलन किया था, तब Governor ने हमें स्पष्ट कहा था कि केवट, मल्लाह और अन्य लोगों का नाम ओबीसी से खारिज करके नई सूची बनाई जाए. इसके बाद हमने मांग की कि President की अधिसूचना से इसे लागू किया जाना चाहिए. हम किसी को धोखा नहीं देते हैं, बल्कि लोग अपनी गलतियों की वजह से धोखा खा रहे हैं, इसलिए आज इस तरह की स्थिति बनी हुई है.

उन्होंने कहा कि अब इसे भाजपा के एजेंडे में शामिल किया गया है. इसे एजेंडे के तहत सीएम योगी ने इस मुद्दे को विधानसभा में उठाते हुए कहा कि इन जातियों से जुड़े लोग भी इस श्रेणी में शामिल किए जाने के हकदार हैं. सामाजिक न्याय मंत्रालय की ओर से इस दिशा में लगातार काम किया जा रहा है. रही बात मेरी, तो मैं लगातार एक सच्चे मित्र के रूप में काम कर रहा हूं. हम यही चाहते हैं कि इस दिशा में किसी भी प्रकार की कोताही स्वीकार नहीं की जाए.

एक सवाल के जवाब में मंत्री ने कहा कि बिना ठोस सबूत के किसी भी नतीजे पर नहीं पहुंचा जा सकता. जांच हो रही है, जो कोई भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. विपक्ष के लोग बेवजह Government और संत के लोगों को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे हैं. उन्हें टारगेट कर रहे हैं. उन्हें आलोचनाओं के घेरे में लाने की कोशिश कर रहे हैं, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता है. मैं तो कुल मिलाकर यही कहूंगा कि चोर तो चोर ही होता है. लिहाजा, किसी भी चोर के खिलाफ कार्रवाई करने की एक संवैधानिक प्रक्रिया होती है और मौजूदा समय में उसी प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है और उस प्रक्रिया के साथ किसी भी प्रकार की कोताही स्वीकार नहीं की जा रही है.

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