
Bengaluru, 4 जून . वरिष्ठ भाजपा नेता और कर्नाटक विधानसभा में नेता विपक्ष आर. अशोक ने कर्नाटक Government से राज्य की वित्तीय स्थिति पर एक वित्तीय श्वेत पत्र (फाइनेंसियल वाइट पेपर) जारी करने की मांग की है. उन्होंने इसके लिए केरल का उदाहरण दिया.
केरल Government के कदम का उल्लेख करते हुए अशोक ने कहा कि वहां के Chief Minister वीडी सतीशन ने वित्तीय श्वेत पत्र पेश कर राज्य की वास्तविक आर्थिक स्थिति जनता के सामने रखी है. उन्होंने कहा कि कर्नाटक को भी ऐसा ही करना चाहिए.
उन्होंने Chief Minister डी. के. शिवकुमार और राज्य Government से अपील की कि वे बिना देरी किए कर्नाटक विधानसभा में राज्य की वित्तीय स्थिति पर विस्तृत श्वेत पत्र पेश करें.
अशोक ने कहा कि कर्नाटक की जनता को यह जानने का अधिकार है कि पूर्व Chief Minister सिद्दारमैया के नेतृत्व वाली Government राज्य के लिए कैसी आर्थिक स्थिति छोड़कर गई है. उन्होंने राज्य के बढ़ते कर्ज, वित्तीय हालत और पिछले वर्षों में कथित तौर पर हुए फिजूलखर्च और वोट बैंक की राजनीति पर सवाल उठाए.
उन्होंने पूछा कि राज्य पर कितना कर्ज चढ़ा है, उसकी वास्तविक वित्तीय स्थिति क्या है और कथित कुप्रबंधन के कारण आने वाली पीढ़ियों पर कितना आर्थिक बोझ डाला गया है.
विपक्ष के नेता ने कहा कि अगर Government के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है, तो उसे तुरंत विधानसभा में श्वेत पत्र पेश करना चाहिए, ताकि जनता राज्य के वित्तीय रिकॉर्ड को साफ-साफ देख सके.
उन्होंने कहा कि कर्नाटक पारदर्शिता और जवाबदेही का हकदार है और जनता को यह बताया जाना चाहिए कि पिछली Government के आर्थिक फैसलों की वास्तविक कीमत क्या रही.
इससे पहले भी भाजपा नेता ने कांग्रेस Government पर कर्नाटक को ‘कर्ज के ऐसे समुद्र में धकेलने’ का आरोप लगाया था, जिससे निकलना मुश्किल है. उन्होंने यह भी दावा किया कि विकास कार्य लगभग ठप हो गए हैं.
भाजपा पहले भी मांग कर चुकी है कि पूर्व Chief Minister सिद्दारमैया बजट पेश करने से पहले राज्य के खजाने की वास्तविक आर्थिक स्थिति बताने के लिए श्वेत पत्र जारी करें.
गौरतलब है कि Chief Minister पद छोड़ने से पहले अपनी आखिरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिद्दारमैया ने उन आरोपों को खारिज कर दिया था कि कर्नाटक की गारंटी योजनाओं ने सरकारी खजाने को खाली कर दिया है. उन्होंने कहा था कि राज्य का वित्तीय प्रदर्शन मजबूत रहा है और GST संग्रह के मामले में कर्नाटक Maharashtra के बाद देश में दूसरे स्थान पर है.
सिद्दारमैया ने बताया था कि राज्य की आर्थिक विकास दर 8.1 प्रतिशत रही, जो राष्ट्रीय औसत 7.4 प्रतिशत से अधिक है. उन्होंने अपने कर्ज प्रबंधन का बचाव करते हुए कहा था कि राज्य का राजकोषीय घाटा वित्तीय जिम्मेदारी अधिनियम के तहत तय 3 प्रतिशत की सीमा के भीतर रहा जबकि राज्य का कुल कर्ज सकल राज्य घरेलू उत्पाद का लगभग 24.94 प्रतिशत था.
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एएमटी/पीएम
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