
New Delhi, 24 जुलाई . केंद्र Government ने Friday को बताया कि सॉइल हेल्थ कार्ड स्कीम (मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना) के तहत अब तक 25.89 करोड़ से अधिक सॉइल हेल्थ कार्ड जारी किए जा चुके हैं. वहीं, प्राकृतिक खेती पर राष्ट्रीय मिशन (नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग-एनएमएनएफ) का दायरा बढ़कर 18,786 क्लस्टर्स तक पहुंच गया है, जो कुल 8.80 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करते हैं. Government ने वैज्ञानिक तरीके से मिट्टी के प्रबंधन और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के लिए चलाए जा रहे राष्ट्रीय प्रयासों की जानकारी दी.
सरकारी बयान के अनुसार, सॉइल हेल्थ कार्ड स्कीम के तहत संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए एग्रीकल्चरल टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट एजेंसियों (एटीएमए) और कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) के सहयोग से अब तक करीब 7.17 लाख प्रदर्शन आयोजित किए जा चुके हैं. इसके अलावा खेत बचाओ अभियान जैसे जन-जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को टिकाऊ खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है.
Government ने बताया कि अब तक 70,002 कृषि सखियों को प्रशिक्षित किया गया है, ताकि वे गांव स्तर पर किसानों तक मिट्टी के स्वास्थ्य संबंधी सलाह और जानकारी पहुंचा सकें. वहीं, स्कूल सॉइल हेल्थ प्रोग्राम के तहत वर्ष 2025-26 में 4,430 स्कूलों और 1,29,167 विद्यार्थियों का पंजीकरण किया गया है.
बयान में कहा गया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म, जियोस्पेशियल मैपिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसी आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल से मिट्टी के आकलन और किसानों को सलाह देने की सेवाएं अधिक प्रभावी हुई हैं. इससे कृषि उत्पादकता बढ़ाने, जलवायु परिवर्तन से मुकाबला करने और दीर्घकालिक कृषि स्थिरता को मजबूत करने में मदद मिल रही है.
Government के अनुसार, देश की 46 प्रतिशत से अधिक कार्यबल कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों में कार्यरत है. ऐसे में मिट्टी का स्वास्थ्य सीधे तौर पर किसानों की आय, खाद्य सुरक्षा और देश की आर्थिक स्थिरता को प्रभावित करता है. इसी को ध्यान में रखते हुए India ने टिकाऊ मिट्टी और भूमि प्रबंधन, जलवायु अनुकूल कृषि, प्राकृतिक खेती, सॉइल मैपिंग और डिजिटल कृषि पर विशेष जोर दिया है.
बयान में कहा गया कि नेशनल मिशन फॉर सस्टेनेबल एग्रीकल्चर (एनएमएसए) और नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग (एनएमएनएफ) जैसी योजनाएं संसाधनों के बेहतर उपयोग और जलवायु के अनुकूल कृषि पद्धतियों को बढ़ावा दे रही हैं. वहीं, सॉइल हेल्थ कार्ड स्कीम मिट्टी की जांच के आधार पर किसानों को उचित पोषक तत्वों के इस्तेमाल संबंधी सलाह उपलब्ध कराती है.
Government ने यह भी बताया कि नेशनल मिशन फॉर ए ग्रीन इंडिया, नेशनल मिशन फॉर सस्टेनेबल एग्रीकल्चर और कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम जैसी पहलें मिट्टी में जैविक कार्बन बढ़ाने और लंबे समय तक कार्बन भंडारण को मजबूत करने में मदद कर रही हैं.
India की नेशनल डिटरमाइंड कंट्रीब्यूशन (एनडीसी) प्रतिबद्धताओं के तहत ग्रीन इंडिया मिशन (जीआईएम) का लक्ष्य वर्ष 2030 तक 2.5 से 3.0 अरब टन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य का अतिरिक्त कार्बन सिंक तैयार करना है. इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट (आईएसएफआर) 2023 के अनुसार, वर्ष 2005 से 2021 के बीच देश में 2.29 अरब टन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य का अतिरिक्त कार्बन सिंक तैयार किया जा चुका है, जो इस दिशा में India की उल्लेखनीय प्रगति को दर्शाता है.
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डीबीपी
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