नई दिल्ली, 3 अप्रैल . सरकार ने राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (एनसीईएल) के जरिए संयुक्त अरब अमीरात को अतिरिक्त 10,000 टन प्याज के निर्यात की अनुमति दी है. सरकार ने यह फैसला ऐसे समय में लिया है, जब ईद का त्योहार नजदीक आ रहा है.

विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) द्वारा मंगलवार देर रात जारी किया गया यह आदेश 14,400 टन प्याज के अतिरिक्त होगा, जिसे पहले 1 मार्च को संयुक्त अरब अमीरात में निर्यात करने की अनुमति दी गई थी. यह एनसीईएल के जरिए किया जा रहा है, जिसने हर तिमाही के लिए 3,600 मीट्रिक टन की मात्रा सीमा तय कर रखी है.

बढ़ती घरेलू कीमतों को नियंत्रित करने के लिए 8 दिसंबर, 2023 को शिपमेंट पर प्रतिबंध की घोषणा के बाद से मित्र देशों के प्रति की गई प्रतिबद्धता को पूरा करने के लिए अब तक 79,150 टन प्याज को निर्यात के लिए मंजूरी दे दी गई है.

अल नीनो से प्रेरित सूखे के कारण सरकार को वित्तवर्ष 2023-24 के दौरान प्याज निर्यात को विनियमित करने के लिए नीतिगत उपाय करने की जरूरत पड़ी. इन उपायों में 19 अगस्त, 2023 को प्याज के निर्यात पर 40 प्रतिशत शुल्क लगाना, 29 अक्टूबर, 2023 से 800 अमेरिकी डॉलर प्रति मीट्रिक टन का न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) लगाना और 8 दिसंबर, 2023 से निर्यात पर प्रतिबंध लगाकर घरेलू उपभोक्ताओं को सस्ती कीमतों पर प्याज की उपलब्धता सुनिश्चित करना शामिल है.

प्याज की बढ़ती कीमतों के साथ केंद्र सरकार अपने बफर स्टॉक से मुख्य सब्जी जारी कर रही है.

इसने 26 मार्च को एनसीसीएफ और एनएएफईडी को चालू रबी-2024 फसल के दौरान देश की बफर जरूरत के लिए सीधे किसानों से 5 लाख टन प्याज खरीदने का निर्देश दिया था.

रबी प्याज की फसल देश में प्याज की उपलब्धता के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह देश में वार्षिक उत्पादन में 72 -75 प्रतिशत का योगदान देती है. सालभर प्याज की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए रबी प्याज भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें खरीफ प्याज की तुलना में बेहतर शेल्फ जीवन होता है और इसे नवंबर-दिसंबर तक आपूर्ति के लिए संग्रहीत किया जा सकता है.

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