
New Delhi, 8 अगस्त . बढ़ती उम्र और कामकाज के बीच शरीर धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है. आगे चलकर यही शारीरिक समस्याएं बड़ी बीमारियों का कारण बनती है. हालांकि, योग और नियमित खान-पान से इस पर सुधार किया जा सकता है. ऐसे ही चुनौतीपूर्ण और शक्तिशाली आसनों में से एक है पिंच मयूरासन, जिसे अंग्रेजी में ‘फेदर पीकॉक पोज’ भी कहा जाता है.
इस आसन में शरीर को सिर के बल नहीं, बल्कि कोहनियों और अग्रबाहुओं यानी कोहनी से कलाई तक के हिस्से के सहारे उल्टा साधा जाता है. देखने में जितना आसान लगता है, अभ्यास में उतना ही संतुलन, ताकत और धैर्य चाहिए. पिंच मयूरासन तन और मन दोनों के लिए फायदेमंद है. यह आसन सिर्फ बाहों, कंधों और कोर को ही मजबूत नहीं करता, बल्कि डर पर काबू पाकर आत्मविश्वास बढ़ाने में भी मदद करता है.
आयुष मंत्रालय ने पिंच मयूरासन को संतुलन और व्युत्क्रम आसन के रूप में मान्यता दी है. इसके अनुसार, पिंच मयूरासन को करने के दौरान शरीर का पूरा भार कोहनियों और बांहों पर होता है.
यह आसन कंधों, पीठ और पैरों की हड्डियों पर असर करता है. इस आसन को करते समय जब कूल्हों को ऊपर उठाया जाता है, तो शरीर की मांसपेशियों में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है और पोषक तत्व तेजी से हड्डियों तक पहुंचते हैं. यह आसन शरीर को ऊर्जावान बनाता है और कमर के निचले हिस्से की मजबूती बढ़ाता है.
इस आसन के नियमित अभ्यास से शरीर मूवमेंट की क्षमता बेहतर होती है, जिससे अभ्यास करने वाले एडवांस्ड आर्म बैलेंस के लिए मदद मिलती है.
इस आसन को करने के लिए जमीन पर घुटनों के बल बैठकर अपनी दोनों कोहनियों और हथेलियों को फर्श पर समानांतर रखें. पैरों को सीधा करते हुए कूल्हों और हिप्स को ऊपर उठाएं, जैसे कि अधोमुख श्वानासन में करते हैं. कोर और कंधों की ताकत का उपयोग करते हुए धीरे-धीरे पैरों को हवा में ऊपर की ओर उठाएं. सिर को जमीन से ऊपर रखते हुए पैरों को आसमान की तरफ सीधा तान दें.
उच्च रक्तचाप, कंधे या गर्दन में चोट होने पर यह आसन न करें. शुरुआत में संतुलन बनाने के लिए दीवार का सहारा लें.
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एनएस/एएस
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