
New Delhi, 25 मई . Union Minister गजेंद्र सिंह शेखावत ने Monday को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि 2014 के बाद देश में व्यवस्था के प्रति विश्वास मजबूत हुआ है और India “विकसित भारत” बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि Prime Minister Narendra Modi के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में देश ने कई महत्वपूर्ण बदलाव देखे हैं और यह समय India के भविष्य के लिए बेहद अहम रहा है.
मंत्री ने कहा कि 2014 से पहले देश में शासन व्यवस्था को लेकर लोगों में अविश्वास का माहौल था, लेकिन पिछले वर्षों में Government की नीतियों और प्रयासों के कारण जनता का भरोसा बढ़ा है. उन्होंने कहा कि आज India केवल चुनौतियों का सामना नहीं कर रहा है, बल्कि उन्हें अवसर में बदल रहा है और मजबूत अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ रहा है.
इसी बीच, तुहिन सिन्हा ने भी पत्रकारों से बातचीत में कहा कि देश में “अर्बन नक्सल” की सोच लंबे समय से मौजूद रही है और समय-समय पर इस विचारधारा ने समाज और संस्थाओं को प्रभावित करने की कोशिश की है. उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2010 के आसपास नक्सलवाद की हिंसा अपने चरम पर थी, जिसमें बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए थे.
सिन्हा ने कहा कि कुछ शहरी इलाकों और विश्वविद्यालय परिसरों में इस विचारधारा को समर्थन देने वाले समूह सक्रिय रहे हैं. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उस समय की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन Government के दौरान कई बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को लेकर एक सलाहकार निकाय बनाया गया था, जिस पर इस तरह की विचारधारा से जुड़े लोगों को शामिल करने के आरोप लगते रहे हैं.
उन्होंने यह भी कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ चलाए गए अभियानों और नीतियों को उस समय अपेक्षित समर्थन नहीं मिला, जिससे सुरक्षा बलों के प्रयासों पर असर पड़ा. उन्होंने कुछ न्यायिक निर्णयों और Political प्रतिक्रियाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौर में Government की रणनीति काफी कमजोर रही.
तुहिन ए. सिन्हा ने आरोप लगाया कि कुछ Political दल और नेता इस विचारधारा को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन देते रहे हैं. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ सामाजिक आंदोलनों और छात्रों से जुड़े मामलों में Political हस्तक्षेप देखने को मिला है. हालांकि उनके इन बयानों पर विभिन्न Political दलों की ओर से अक्सर विरोध भी दर्ज कराया जाता रहा है.
उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ ऑनलाइन Political प्लेटफॉर्म और समूहों की संरचना और गतिविधियों पर भी सवाल उठते रहे हैं. उन्होंने कहा कि आज के समय में कई ऐसे डिजिटल Political संगठन सामने आ रहे हैं, जिनकी सदस्यता और गतिविधियों को लेकर पारदर्शिता की कमी देखी जाती है.
इस बातचीत में उन्होंने यह भी कहा कि राजनीति को social media या डिजिटल माध्यमों पर हल्के-फुल्के तरीके से प्रस्तुत करने से गंभीर Political विमर्श प्रभावित हो सकता है. उन्होंने कहा कि Political आंदोलनों और विचारों को जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ाना चाहिए, ताकि लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत बनी रहे.
उन्होंने अंत में कहा कि देश को वैचारिक रूप से एकजुट रहकर सभी प्रकार की चरमपंथी या विभाजनकारी सोच के खिलाफ खड़ा होना चाहिए. उनके अनुसार, India को आगे बढ़ाने के लिए स्थिरता, विकास और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करना सबसे जरूरी है.
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एसएचके/
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