
लॉस एंजिल्स, 23 जुलाई . अमेरिका में India का सबसे नया डिप्लोमैटिक मिशन खुद को अमेरिकी प्रशांत दक्षिणपश्चिम क्षेत्र में व्यापार, तकनीक, निवेश और लोगों के बीच संबंधों को बढ़ाने के लिए एक गेटवे के तौर पर तैयार कर रहा है. लॉस एंजिल्स में भारतीय कॉन्सुल जनरल डॉ. केजे श्रीनिवास ने कहा कि यह क्षेत्र भारत-अमेरिका की बढ़ती साझेदारी के लिए बहुत सारे अवसर और क्षमता देता है.
लॉस एंजिल्स में India के महावाणिज्य दूतावास ने अपनी स्थापना के एक साल से भी कम समय में पारंपरिक वाणिज्यिक सेवाओं की भूमिका से आगे बढ़ते हुए खुद को एक रणनीतिक साझेदारी केंद्र के रूप में विकसित करना शुरू कर दिया है.
इसका उद्देश्य अमेरिका के सबसे गतिशील आर्थिक क्षेत्रों में से एक को India की उन्नत विनिर्माण, एआई, सेमीकंडक्टर, जैव प्रौद्योगिकी, रक्षा, शिक्षा और नवाचार से जुड़ी बढ़ती महत्वाकांक्षाओं के साथ जोड़ना है.
India के महावाणिज्य दूत डॉ. श्रीनिवास ने को दिए एक खास इंटरव्यू में कहा, “लॉस एंजिल्स स्थित India का महावाणिज्य दूतावास पिछले वर्ष खोला गया था. यह Prime Minister Narendra Modi की उस घोषणा के अनुरूप था, जिसमें उन्होंने पिछले साल की शुरुआत में बोस्टन और लॉस एंजिल्स में दो नए भारतीय वाणिज्य दूतावास खोलने की घोषणा की थी.”
उन्होंने कहा, “यह फैसला भारतीय प्रवासी समुदाय की लंबे समय से चली आ रही मांग और अमेरिका के प्रशांत दक्षिणपश्चिम क्षेत्र में India के लिए मौजूद अपार अवसरों और संभावनाओं को देखते हुए लिया गया था.”
मिशन ने पिछले साल के आखिर में काम करना शुरू किया, जनवरी में अपनी स्थायी जगह पर शिफ्ट हुआ. इसके बाद अप्रैल से वीजा, भारतीय विदेशी नागरिकता (ओसीआई) कार्ड और दूसरी नागरिक सेवाओं सहित कॉन्सुलर सेवाओं की पूरी रेंज दे रहा है.
उन्होंने कहा, “हम अभी अलग-अलग कमर्शियल पहलों, कल्चरल पहलों पर काम कर रहे हैं और साथ ही, हम उन सभी स्टेकहोल्डर्स को शामिल कर रहे हैं जो सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए जरूरी हैं, जिन्हें इसकी जरूरत है.”
लॉस एंजिल्स मिशन दक्षिणी कैलिफोर्निया, एरिजोना, नेवाडा और न्यू मैक्सिको में काम करता है, जिससे कैलिफोर्निया सैन फ्रांसिस्को के साथ दो भारतीय दूतावासों वाला अकेला अमेरिकी राज्य बन गया है.
डॉ. श्रीनिवास ने कहा कि इस इलाके की आर्थिक प्रोफाइल ने इसे India की नई डिप्लोमैटिक मौजूदगी के लिए एक स्वाभाविक पसंद बना दिया है.
उन्होंने कहा, “हम एरिजोना, नेवाडा, न्यू मैक्सिको और बेशक दक्षिणी कैलिफोर्निया में काम करते हैं. इस इलाके में अवसर और क्षमता बहुत ज्यादा थे. और इसी बात को पहचानते हुए, अब हम इस इलाके में ज्यादा ध्यान से जुड़ पा रहे हैं.”
कॉन्सुलर ज्यूरिस्डिक्शन में भारतीय मूल के लगभग 550,000 से 600,000 लोग रहते हैं. इनमें भारतीय पासपोर्ट होल्डर और भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक शामिल हैं. ये सभी लोग इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, रक्षा, एयरोस्पेस, मनोरंजन, स्वास्थ्य सुविधा, बायोटेक्नोलॉजी, लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं. इन्हें कॉन्सुलट भविष्य में भारत-अमेरिका सहयोग के मुख्य ड्राइवर के तौर पर भी देखता है.
इसकी प्राथमिकताओं में Mumbai और लॉस एंजिल्स के बीच सिस्टर-सिटी संबंधों को फिर से शुरू करना है; यह 1972 में साइन किया गया एक समझौता है जो काफी हद तक ठप पड़ा है.
डॉ. श्रीनिवास ने कहा, “मैंने लॉस एंजिल्स शहर, मेयर के ऑफिस से संपर्क किया और हम Maharashtra Government से भी संपर्क कर रहे हैं. एक-दूसरे की सराहना करनी होगी.”
उन्होंने कहा कि मनोरंजन जाहिर तौर पर दो ग्लोबल शहरों को जोड़ता है, लेकिन साझेदारी को लॉजिस्टिक्स, फंडिंग, व्यापार और निवेश को भी शामिल करके बढ़ाया जा सकता है.
डॉ. श्रीनिवास ने कहा, “यहां का पोर्ट ऑफ एलए और पोर्ट ऑफ लॉन्ग बीच शायद अमेरिका के पश्चिमी कोस्ट के सबसे बड़े पोर्ट हैं. Mumbai खुद एक कमर्शियल हब है. हम भारतीय निवेशकों में एलए आने में दिलचस्पी देख रहे हैं. इसलिए हम सिर्फ मनोरंजन पर ही नहीं, बल्कि इन चीजों पर भी काम कर रहे हैं.”
मिशन नवीकरणीय ऊर्जा, जलवायु तकनीक, जल प्रबंधन और इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट रीसाइक्लिंग में भी सहयोग बढ़ाना चाहता है. उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि कैलिफोर्निया के पास जिस स्तर की विशेषज्ञता है और एरिजोना जल प्रबंधन के क्षेत्र में जो अनुभव रखता है, उसका कोई मुकाबला नहीं है.”
उन्होंने आगे कहा, “मुझे पूरा विश्वास है कि हम इन क्षेत्रों के साथ मिलकर न केवल इन प्रमुख सेक्टरों में सहयोग बढ़ा सकते हैं, बल्कि पर्यटन को भी प्रोत्साहित कर सकते हैं और इस क्षेत्र में India की सांस्कृतिक पहचान को और मजबूत कर सकते हैं.”
–
पीएम
Skip to content