जी-20 की अध्यक्षता से ग्लोबल साउथ की आवाज बनने तक, वैश्विक मंचों पर बढ़ी भारत की भूमिका, कूटनीति का नया केंद्र बना

New Delhi, 19 जून . बदलते वर्ल्ड ऑर्डर में India वैश्विक मंचों के केंद्र पर खुद को स्थापित कर रहा है. आज हर तरह के फोरम और शिखर सम्मेलनों में India चर्चा का केंद्र होता है. हाल के वर्षों में India ने वैश्विक एजेंडा-सेटर और ब्रिज-बिल्डर के रूप में खुद को स्थापित किया है. India के कूटनीतिक प्रदर्शन ने दुनिया के सामने इसकी छवि बदल दी है.

वैश्विक मंचों पर करीब एक दशक पहले तक India को एक उभरती अर्थव्यवस्था के रूप में देखा जाता था. हालांकि, आज का India एजेंडा तय करने, विकसित और विकासशील देशों के बीच एक पुल की भूमिका में नजर आ रहा है.

India के पास वैश्विक मंचों पर कई ऐसे अवसर मिले, जहां उसने खुद को साबित किया. 2023 में जी-20 शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता, ब्रिक्स और एससीओ में अपनी भूमिका और ग्लोबल साउथ के नेतृत्व के साथ India ने अपने कूटनीतिक प्रदर्शन से सबका ध्यान खींचा है. अमेरिका से लेकर यूरोपीय और मिडिल ईस्ट देशों ने वैश्विक मंचों पर इस बात को स्वीकार किया है कि आज के India को कमतर आंकना भारी चूक हो सकती है.

जी-20 की अध्यक्षता के दौरान India ने ‘वन अर्थ, वन फैमिली, वन फ्यूचर’ के जरिए पूरे विश्व को एक परिवार बताकर एकजुटता का संदेश दिया. इसके साथ ही India की अध्यक्षता में अफ्रीकी संघ को स्थायी सदस्य बनाया. इसके साथ ही India ग्लोबल साउथ की आवाज बनकर उभरा.

जी-20 शिखर सम्मेलन में India ने विकासशील देशों की चिंताओं को अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया. New Delhi में जी-20 समिट से पहले India ने विशेष रूप से ‘वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ’ शिखर सम्मेलनों की अध्यक्षता की. इस समिट में 125 से अधिक विकासशील देशों को शामिल किया गया. ‘वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ’ समिट में उनकी चिंताओं और अपेक्षाओं पर चर्चा हुई, जिसके बाद इसे जी-20 के मुख्य एजेंडे में शामिल किया गया.

ब्रिक्स और एससीओ जैसे वैश्विक मंचों पर India एक सक्रिय सदस्य के तौर पर अपनी भूमिका निभा रहा है. India ने ब्रिक्स के विस्तार को लेकर India का रुख स्पष्ट और संतुलित रहा है. हालांकि, India ब्रिक्स के विस्तार का विरोध नहीं कर रहा है लेकिन उसकी मांग है कि विस्तार की प्रक्रिया पारदर्शी हो. India इसके तहत चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने की भी कोशिश कर रहा है. ब्रिक्स समिट में स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को चर्चा का मुद्दा बनाने के साथ बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था बनाने पर भी जोर दिया.

क्वाड और हिंद-प्रशांत की अगर बात करें, तो India ने अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ समुद्री सुरक्षा, सप्लाई चेन, तकनीक, सेमीकंडक्टर और हिंद-प्रशांत रणनीति समेत अन्य क्षेत्रों में सहयोग को मजबूती से आगे बढ़ाने पर जोर दे रहा है.

एससीओ में भी India की भूमिका संतुलित है. India आतंकवाद विरोधी सहयोग और मध्य एशिया तक पहुंच पर जोर दे रहा है. India का क्वाड और एससीओ दोनों में शामिल रहना इसकी विदेश नीति और कूटनीतिक समझ को दर्शाता है. क्वाड के जरिए India हिंद-प्रशांत में चीन की बढ़ती आक्रामकता को संतुलित करने की कोशिश करता है. एससीओ India के लिए क्षेत्रीय आतंकवाद, मादक पदार्थों की तस्करी और अफगानिस्तान जैसे मुद्दों पर चीन और Pakistan के साथ एक मंच पर चर्चा का अवसर है.

India की जलवायु और ऊर्जा कूटनीति पर अगर ध्यान दें तो यह मिशन लाइफ, ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे मुद्दों के जरिए सिर्फ जलवायु वार्ता का हिस्सा नहीं बल्कि समाधान प्रस्तुत करने वाला देश बनने की कोशिश कर रहा है.

वैश्विक संकटों के समय में India की सक्रियता एक विश्वसनीय राष्ट्र के रूप में रही है. कोविड वैक्सीन कूटनीति, ऑपरेशन गंगा, ऑपरेशन कावेरी, ऑपरेशन अजय और पश्चिम एशिया संकटों के दौरान निकासी अभियान ये दर्शाते हैं कि कैसे India न केवल विदेश में रह रहे अपने नागरिकों के लिए बल्कि विदेशी नागरिकों की भी मदद और सुरक्षा में हिस्सेदार है. यही कारण है कि विश्व पटल पर उसकी विश्वसनीयता बढ़ी है.

पीएम