
मुंगेर, 9 अगस्त . विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले में उमड़ रहे आस्था के सैलाब के बीच कांवड़ियों की भक्ति के कई अनोखे रूप देखने को मिल रहे हैं. कोई सैकड़ों किलोमीटर की पैदल यात्रा कर बाबा बैद्यनाथ के दरबार में पहुंचने का संकल्प लिए है, तो कोई अपनी कांवड़ को ही भगवान शिव के स्वरूप में ढालकर यात्रा कर रहा है. कच्ची कांवड़िया पथ पर गुजरती ऐसी विशाल और आकर्षक कांवर न सिर्फ श्रद्धालुओं का ध्यान खींच रही हैं, बल्कि मेले की भव्यता को भी बढ़ा रही हैं.
देश के अलग-अलग हिस्सों से आए शिवभक्त अपनी श्रद्धा और रचनात्मकता के जरिए इस यात्रा को यादगार बना रहे हैं. इन अनोखी कांवड़ों को देखने के लिए रास्ते में स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं की भीड़ भी उमड़ रही है. श्रावणी मेले में बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर बढ़ते कांवड़ियों की आस्था हर दिन नए और अनोखे रूप में सामने आ रही है.
मुंगेर के कच्ची कांवड़िया पथ पर इन दिनों अलग-अलग राज्यों से पहुंचे शिवभक्तों की विशाल और आकर्षक कांवड़ लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई हैं. कहीं 51 फीट लंबी कांवड़ पर 12 ज्योतिर्लिंगों की झांकी सजी है, तो कहीं बाबा भोलेनाथ की विशाल प्रतिमा को ही कांवड़ का रूप दिया गया है. पश्चिम बंगाल के कोलकाता से आए करीब 40 श्रद्धालुओं की टोली 250 किलोग्राम वजनी बाबा भूतनाथ की प्रतिमा रूपी भव्य कांवड़ लेकर बाबाधाम की ओर बढ़ रही है. महादेव के स्वरूप में सजाई गई इस कांवड़ में आकर्षक सजावट और धार्मिक प्रतीकों का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है.
भारी होने के कारण टोली के सदस्य बारी-बारी से इसे अपने कंधों पर उठाकर यात्रा पूरी कर रहे हैं. रास्ते में इस कांवड़ को देखने के लिए लोग ठहर जा रहे हैं. इसी तरह कोलकाता से आए करीब 60 शिवभक्तों की एक अन्य टोली 110 किलोग्राम वजनी बाबा भोलेनाथ की विशाल प्रतिमा को कांवड़ का रूप देकर सुल्तानगंज से बाबाधाम की यात्रा कर रही है. प्लास्टर ऑफ पेरिस, फोम, कपड़े और आकर्षक सजावटी सामग्री से तैयार इस कांवड़ को बनाने में करीब दो महीने का समय लगा है. इसे एक साथ चार कांवड़िया अपने कंधों पर उठाकर चलते हैं. टोली के सदस्य बारी-बारी से कांवड़ को उठाकर अपनी यात्रा पूरी कर रहे हैं.
वहीं, Madhya Pradesh के कटनी से आई शिवशक्ति कांवड़िया संघ की करीब 250 सदस्यीय टोली भी अपनी 51 फीट लंबी विशाल कांवड़ के साथ लोगों का ध्यान खींच रही है. इस कांवड़ पर 12 ज्योतिर्लिंगों की आकर्षक प्रतिकृतियां सजाई गई हैं. संघ के सदस्यों के मुताबिक, वे पिछले 25 वर्षों से लगातार बाबा बैद्यनाथ के दरबार में जलाभिषेक करने पहुंच रहे हैं. इस वर्ष यात्रा के 25 साल पूरे होने के कारण उन्होंने इसे विशेष बनाने के लिए 51 फीट लंबी विशाल कांवड़ तैयार की है.
संघ के सदस्यों ने बताया कि इस विशाल कांवड़ को तैयार करने में करीब एक महीने का समय लगा. कच्ची कांवड़िया पथ पर जहां भी यह टोली पहुंचती है, श्रद्धालु रुककर कांवड़ को निहारते हैं और उसकी तस्वीरें लेते हैं. रास्ते भर ‘बोल बम’ और ‘हर हर महादेव’ के जयघोष से पूरा वातावरण शिवमय बना हुआ है. कांवड़ियों का कहना है कि उनके लिए यह यात्रा केवल सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करने की परंपरा नहीं, बल्कि आस्था, संकल्प और समर्पण का प्रतीक है. भारी-भरकम कांवड़ों के बावजूद शिवभक्तों का उत्साह कम नहीं हुआ है.
उनका कहना है कि बाबा भोलेनाथ के प्रति श्रद्धा के आगे कांवड़ का वजन और लंबा रास्ता भी छोटा पड़ जाता है. श्रावणी मेले में इन अनोखी कांवड़ यात्राओं ने एक बार फिर दिखाया है कि आस्था के रास्ते पर कठिनाइयां भक्तों के उत्साह को रोक नहीं सकतीं. 250 किलो की कांवड़ हो, 110 किलो की भोलेनाथ की प्रतिमा हो या फिर 51 फीट लंबी ज्योतिर्लिंगों से सजी कांवड़-इन सभी के पीछे एक ही संकल्प है, बाबा बैद्यनाथ के दरबार में पहुंचकर उन्हें गंगाजल अर्पित करना.
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एमएनपी/एसके
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