भारतीय तटरक्षक बल के लिए बन रहा है चौथा नेक्स्ट जेनरेशन ओपीवी

New Delhi, 25 जून भारतीय तटरक्षक बल के लिए एक और ‘नेक्स्ट जेनरेशन ऑफशोर पेट्रोल वेसल’ का निर्माण शुरू किया गया है. यह भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) के लिए बनाए जा रहे छह नेक्स्ट जेनरेशन ऑफशोर पेट्रोल वेसल (एनजीओपीवी) में से चौथा पोत है. इस से India की समुद्री सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मदद मिलेगी. Thursday को इस अत्याधुनिक पोत की कील-लेइंग यानी जहाज की आधारशिला स्थापना समारोह का आयोजन किया गया.

यह पोत मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) द्वारा पूरी तरह स्वदेशी तकनीक और आधुनिक प्रणालियों के साथ निर्मित किया जा रहा है. समारोह में भारतीय तटरक्षक बल और मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया. रक्षा मंत्रालय के मुताबिक यह परियोजना India Government के आत्मनिर्भर India अभियान को मजबूती देगी. विशेषज्ञों का कहना है कि यह परियोजना आत्मनिर्भर India अभियान के साथ-साथ देश की समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाली मानी जा रही है.

गौरतलब है कि समुद्री जहाज निर्माण की प्रक्रिया में कील-लेइंग समारोह को एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जाता है. यह वह चरण होता है जब जहाज के मुख्य ढांचे का निर्माण औपचारिक रूप से शुरू होता है. किसी भी युद्धपोत या गश्ती पोत के निर्माण कार्यक्रम में यह एक ऐतिहासिक और प्रतीकात्मक अवसर होता है. निर्माणाधीन नेक्स्ट जेनरेशन ऑफशोर पेट्रोल वेसल आधुनिक मशीनरी, उन्नत सेंसर, अत्याधुनिक नेविगेशन प्रणाली और नवीनतम समुद्री निगरानी उपकरणों से लैस होंगे.

इन पोतों को लंबी दूरी की गश्त, तटीय निगरानी, खोज एवं बचाव अभियान, समुद्री कानून प्रवर्तन तथा विशेष सुरक्षा अभियानों के लिए तैयार किया जा रहा है. इनकी तैनाती से भारतीय तटरक्षक बल की समुद्र में निगरानी क्षमता और प्रतिक्रिया समय में उल्लेखनीय सुधार होगा. भारतीय तटरक्षक बल और मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड के बीच 20 दिसंबर 2023 को छह नेक्स्ट जेनरेशन ऑफशोर पेट्रोल वेसल के निर्माण का अनुबंध संपन्न हुआ था.

इस परियोजना का उद्देश्य तटरक्षक बल के बेड़े का आधुनिकीकरण करना और भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए उसे और अधिक सक्षम बनाना है. हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती सामरिक गतिविधियों और समुद्री चुनौतियों को देखते हुए भारतीय तटरक्षक बल लगातार अपनी क्षमताओं का विस्तार कर रहा है. ऐसे में नए एनजीओपीवी पोत तस्करी, अवैध मछली पकड़ने, समुद्री प्रदूषण नियंत्रण, आपदा राहत और खोज-बचाव अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.

वहीं, इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका स्वदेशी स्वरूप है. जहाज का डिजाइन, विकास और निर्माण India में ही किया जा रहा है, जिससे देश के रक्षा-उद्योग पारिस्थितिकी तंत्र, जहाज निर्माण क्षेत्र और रोजगार सृजन को भी बढ़ावा मिलेगा. यह पहल India की रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता और रणनीतिक स्वायत्तता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है.

जीसीबी/पीएम