
जेद्दा, 17 जून . सस्टेनेबिलिटी रिव्यू रिपोर्ट 2025 के अनुसार, फॉर्मूला वन ने साल 2018 के बेसलाइन की तुलना में अपने कुल कार्बन फुटप्रिंट को 35 प्रतिशत कम कर लिया है. फॉर्मूला वन साल 2030 तक नेट-जीरो कार्बन स्पोर्ट बनने के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है.
Wednesday को जारी रिपोर्ट से पता चला है कि साल 2024 की तुलना में कार्बन उत्सर्जन में 12 प्रतिशत की कमी आई है. यह दर्शाता है कि खेल के वैश्विक स्तर पर बढ़ने के बावजूद चैंपियनशिप के कामकाज में लगातार प्रगति हो रही है.
इस कमी में एक अहम कारक यात्रा से जुड़ा उत्सर्जन रहा है, जिसमें साल 2018 के बाद से 27 प्रतिशत की गिरावट आई है. टीमों ने सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल में ज्यादा निवेश किया है, और फॉर्मूला वन ने दुनिया भर में कर्मचारियों और उपकरणों के यात्रा करने की जरूरत को कम करने के लिए रिमोट ब्रॉडकास्ट ऑपरेशन का विस्तार किया है.
फॉर्मूला वन ने कहा, “कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए खेल जगत में की गई कोशिशों के नतीजतन, साल 2018 के बाद से फॉर्मूला वन के कामकाज से लगभग 80,000 टन कार्बन डाइऑक्साइड कम हुई है. यह एक व्यक्ति के 500 मिलियन किलोमीटर से ज्यादा उड़ान भरने या लंदन से न्यूयॉर्क के बीच 1,00,000 से ज्यादा वन-वे ट्रांसअटलांटिक यात्राएं करने जैसा है.”
इस साल 22 ग्रांप्री आयोजित करने की योजना है. यह रेस वेन्यू के बीच टीमों, स्टाफ और सामान को लाने-ले जाने से जुड़े उत्सर्जन को कम करने पर लगातार काम कर रहा है.
फॉर्मूला वन ने बताया कि इस कोशिश में दशक के अंत तक एक अहम पड़ाव हासिल कर लिया जाएगा. बयान में कहा गया, “साल 2030 तक, फॉर्मूला 1 के मौजूदा ब्रॉडकास्ट और उससे जुड़े सामान का 50 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा हवाई परिवहन से हटा दिया जाएगा, जो उत्सर्जन में कमी के न्यूनतम लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में एक अहम पड़ाव होगा.”
फॉर्मूला वन के अध्यक्ष और सीईओ स्टेफानो डोमेनिकाली ने बताया कि ताजा आंकड़े टीमों, साझेदारों और आयोजकों की उस साझा प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं, जिसके तहत वे खेल के वैश्विक विस्तार को जारी रखते हुए इसे और अधिक टिकाऊ बनाने की कोशिश कर रहे हैं.
डोमेनिकाली ने कहा, “मुझे उस टीमवर्क पर गर्व है जिसने हमें 2030 तक नेट-जीरो तक पहुंचने की राह पर बनाए रखा है. कैलेंडर को बेहतर बनाकर, सस्टेनेबल फ्यूल और वैकल्पिक ऊर्जा समाधानों में निवेश करके, हमने खेल के बढ़ते दायरे के बावजूद अपने फुटप्रिंट को कम किया है.”
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आरएसजी
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