पूर्व भारतीय फुटबॉलर मेहताब हुसैन ने बताया, कौन हो सकते हैं इस फीफा वर्ल्ड कप में मजबूत दावेदार?

कोलकाता, 11 जून . फीफा वर्ल्ड कप 2026 की शुरुआत 12 जून (भारतीय समय के अनुसार) से होने जा रही है. इस विश्व कप कुल 48 देश खिताब के लिए भिड़ते नजर आएंगे. पूर्व भारतीय फुटबॉलर मेहताब हुसैन ने इंग्लैंड और पुर्तगाल को इस वर्ल्ड कप में मजबूत दावेदार बताया है.

मेहताब हुसैन ने ‘ ’ से कहा, “मैं बचपन से फीफा वर्ल्ड कप देख रहा हूं. मैं माराडोना का खेल देखकर अर्जेंटीना का फैन बन गया. तभी से मुझे फुटबॉल खेलने का जुनून था. India ने भले ही कभी वर्ल्ड कप नहीं खेला, लेकिन हमारे देश में लोग फीफा वर्ल्ड कप देखते हैं. पश्चिम बंगाल में फुटबॉल के प्रति काफी दीवानगी रही है. इस साल मुकाबले India के समय के अनुसार रात में हैं, लेकिन फिर भी लोग इस टूर्नामेंट को देखेंगे, क्योंकि यह चार साल में एक बार आता है.”

हुसैन ने कुछ खिलाड़ियों से इस बार शानदार प्रदर्शन की उम्मीद जताते हुए कहा, “रायन चेर्की, लैमिन यामल, गैवी, पेड्रे, ज्यूड बेलिंघम जैसे खिलाड़ी इस विश्व कप में शानदार प्रदर्शन कर सकते हैं. ये नेमार, मेसी और रोनाल्डो के लिए अंतिम वर्ल्ड कप हो सकता है. फुटबॉल जैसा मनोरंज न तो किसी अन्य खेल और न ही किसी फिल्म में होता है. इन खिलाड़ियों जैसा बनना बहुत मुश्किल है.”

पूर्व भारतीय फुटबॉलर ने इंग्लैंड और पुर्तगाल को मजबूत दावेदार बताते हुए कहा, “इंग्लैंड इस बार ‘डार्क हॉर्स’ साबित हो सकता है. इस टीम ने अपने खेल में काफी बदलाव किया है. उसके खिलाड़ी शीर्ष क्लब में खेलते हैं. अगर टीम का फोकस अच्छा रहा, तो यह टीम डार्क हॉर्स बन सकती है. मुझे पुर्तगाल से भी खासा उम्मीदें हैं, जो इस समय बेहद संतुलित नजर आ रही है. इस साल पुर्तगाल के पास मौका होगा. अर्जेंटीना ने पिछले दो-तीन विश्व कप में शानदार प्रदर्शन किया है. यूरोप और लैटिन अमेरिका की टीमें इस खेल में दबदबा रखती हैं. यहां की टीमें शीर्ष 4 में रह सकती हैं.”

हुसैन मानते हैं कि फुटबॉल में India का भविष्य शानदार है, लेकिन उन्होंने यह भी स्वीकारा है कि भारतीय खिलाड़ियों को विदेशी खिलाड़ियों से सीखना चाहिए. उन्होंने कहा, “भारतीय खिलाड़ियों को इन टीमों से सीख लेनी चाहिए. हमें रोनाल्डो जैसे खिलाड़ियों को रोल-मॉडल बनाना चाहिए. वो खिलाड़ी शानदार खेलते हैं. उनसे पास भी शानदार होते हैं. फुटबॉल में India का भविष्य शानदार है. यह एक वैश्विक खेल है. इस खेल को भी महत्व देना चाहिए. यह खेल आपको पूरी दुनिया में पहचान दिलाता है. जापान इस खेल में साल 1965 के बाद तेजी से आगे बढ़ा है. हमें इस खेल के लिए एक मॉडल तैयार करना होगा. हमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इस खेल को समझना होगा.”

आरएसजी