फोर्ड ने 32 का माइलेज बता बेची कार, माइलेज निकला 19 का, कंपनी पर लगा 1 लाख रुपए का जुर्माना


जोधपुर (Jodhpur) . जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग द्वितीय ने कार निर्माता कंपनी फोर्ड को कार का अधिक माइलेज देने का बताकर अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी मानते हुए एक लाख रुपए का हर्जाना लगाया है.

मामले के अनुसार कुड़ी भगतासनी निवासी अक्षय पारख ने जिला उपभोक्ता संरक्षण आयोग द्वितीय में परिवाद प्रस्तुत कर बताया कि उसने कार निर्माता कंपनी फोर्ड द्वारा अपनी फोर्ड फिएस्टा क्लासिक कार का 32.38 किमी प्रति लीटर माइलेज बताने पर स्थानीय डीलर ओएस कार प्रा.लि. से वर्ष 2012 में कार खरीदी थी, लेकिन उपयोग में लिए जाने पर अन्य दोषों के साथ कार का माइलेज अत्यंत ही कम होना पाया.

अप्राथी द्वारा अपने जवाब में कहा गया कि यह माइलेज एस टेस्टेड पर आधारित है तथा ‘ऑटो कार’ द्वारा उन्हें इस बारे में प्रमाण पत्र भी जारी किया हुआ है. कार का माइलेज वाहन की निर्धारित गति, रखरखाव, टायरों में हवा का दबाव, चलाने के तरीके पर निर्भर करता है व कंपनी द्वारा निर्धारित मानकों की अवहेलना करने पर इसमें कमी आ सकती है.

मामले की सुनवाई के दौरान कार का संयुक्त माइलेज टेस्ट लिया गया तथा आयोग द्वारा निर्माता कंपनी व विक्रेता को उनके मानकों के अनुरूप कार को चलाकर अधिकतम माइलेज दिखाने का अवसर भी दिया गया, लेकिन अप्रार्थी किसी भी परिस्थिति में कार का माइलेज 19.3 किमी प्रति लीटर से अधिक होना साबित नहीं कर सके.

आयोग के अध्यक्ष डॉ. श्यामसुंदर लाटा, सदस्य डॉ. अनुराधा व्यास, आनंदसिंह सोलंकी की पीठ ने अपने निर्णय में कार निर्माता फोर्ड इंडिया लि., गुड़गांव व विक्रेता ओएस कार, जोधपुर (Jodhpur) को सेवा में कमी व अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी ठहराते हुए परिवादी को हुई आर्थिक, शारीरिक व मानसिक क्षतिपूर्ति के लिए एक लाख रुपए अदा करने का आदेश दिया.

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