जबरन धर्मांतरण गलत, इच्छा से धर्म बदलना संवैधानिक अधिकार : अबू आजमी

Mumbai , 19 अगस्त . Samajwadi Party (सपा) के विधायक अबू आजमी ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर बीएलओ की नियुक्ति, कथित तौर पर मतदाताओं के नाम काटे जाने, जबरन धर्म परिवर्तन के खिलाफ प्रस्तावित कानून और लव जिहाद के मुद्दे पर Government की नीतियों पर सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि बीएलओ को पर्याप्त समय और संसाधन नहीं दिए गए, जबकि धर्मांतरण से जुड़े प्रस्तावित प्रावधानों को उन्होंने लोगों के मौलिक अधिकारों में हस्तक्षेप बताया.

आजमी ने कहा कि कई बीएलओ पहले से ही सरकारी या अन्य सेवाओं में कार्यरत हैं और उन्हें अपनी नियमित जिम्मेदारियों के साथ मतदाता सूची से जुड़ा काम करना पड़ रहा है. ऐसे में उन्हें पर्याप्त समय नहीं मिल पा रहा है और इसका असर सत्यापन की प्रक्रिया पर पड़ रहा है. बीएलओ को घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करना था और कई मामलों में तीन बार तक घर जाने की बात कही गई थी, लेकिन वास्तविकता में ऐसा नहीं हुआ.

सपा विधायक ने कहा कि Mumbai महानगर क्षेत्र में कई बीएलओ दूर-दराज के इलाकों से आते हैं. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कोई मीरा रोड में रहता है तो किसी की तैनाती दहिसर जैसे क्षेत्र में हो सकती है. नियमित नौकरी के साथ अतिरिक्त जिम्मेदारी निभाने के कारण कर्मचारियों पर दबाव बढ़ता है. इतने महत्वपूर्ण चुनावी कार्य के लिए बीएलओ को पर्याप्त समय और बेहतर व्यवस्था उपलब्ध कराई जानी चाहिए थी. यदि बीएलओ को पूर्णकालिक रूप से यह जिम्मेदारी दी जाती तो मतदाता सूची के सत्यापन का काम अधिक प्रभावी ढंग से हो सकता था.

मतदाता सूची से करीब दो करोड़ नाम हटाए जाने की बात पर आजमी ने कहा कि असली मुद्दा यह है कि क्या प्रत्येक व्यक्ति का उचित सत्यापन किया गया. उन्होंने सवाल किया कि जब बीएलओ को प्रत्येक घर में कई बार जाने की जिम्मेदारी दी गई थी, तो क्या वास्तव में सभी घरों का उसी तरह सत्यापन हुआ. क्या बीएलओ के साथ पर्याप्त कर्मचारी या सहायक लगाए गए थे. मतदाता सूची से जुड़े काम में लापरवाही हुई है. उन्होंने दावा किया कि जिन समुदायों को सत्ता पक्ष का समर्थक नहीं माना जाता, उनके मताधिकार को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने विशेष रूप से दलित, मुस्लिम, आदिवासी और संविधान में विश्वास रखने वाले लोगों का उल्लेख किया.

जबरन धर्म परिवर्तन के खिलाफ नए कानून या प्रस्तावित प्रावधानों पर आजमी ने कहा कि जबरन धर्म परिवर्तन गलत है, लेकिन किसी बालिग व्यक्ति द्वारा इच्छा से धर्म बदलने के अधिकार को प्रतिबंधित नहीं किया जाना चाहिए. India का संविधान 18 वर्ष की उम्र के बाद व्यक्ति को अपने जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले लेने की स्वतंत्रता देता है. बालिग व्यक्ति अपनी इच्छा से विवाह करने और धार्मिक मान्यताओं के संबंध में निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र होना चाहिए.

उन्होंने Government के उस रुख पर सवाल उठाया, जिसमें धर्म परिवर्तन से पहले अनुमति या किसी निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने की बात कही जा रही है. आजमी ने आरोप लगाया कि ऐसे प्रावधानों का इस्तेमाल लोगों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को प्रभावित करने के लिए किया जा सकता है. ‘लव जिहाद’ के मुद्दे पर अबू आजमी ने कहा कि अलग-अलग धर्मों के लोगों के बीच विवाह India में लंबे समय से होते रहे हैं. कई परिवार अंतर-धार्मिक विवाह को पसंद नहीं करते, लेकिन बालिग व्यक्ति को कानून के तहत अपनी पसंद से विवाह करने का अधिकार प्राप्त है. ‘लव जिहाद’ का मुद्दा Political रूप से इस्तेमाल किया जा रहा है. यदि किसी बालिग पुरुष और महिला की सहमति से अलग-अलग धर्मों में विवाह होता है तो केवल धर्म अलग होने के आधार पर उसे अपराध की श्रेणी में नहीं रखा जाना चाहिए.

उन्होंने कहा कि देश में अधिकतर लोग उसी धर्म को मानते हैं, जिसमें उनका जन्म होता है, लेकिन कुछ लोग बड़े होने के बाद धार्मिक विचारों और व्यक्तिगत अनुभवों के आधार पर अपनी मान्यताओं में बदलाव करते हैं. किसी बालिग व्यक्ति को अपनी इच्छा से जीवनसाथी चुनने और धार्मिक आस्था से जुड़े निर्णय लेने की स्वतंत्रता होनी चाहिए. किसी व्यक्ति के मौलिक अधिकारों पर अंकुश लगाने वाली किसी भी व्यवस्था को संविधान की कसौटी पर परखा जाना चाहिए. यदि दो बालिग अलग-अलग धर्मों से होने के बावजूद सहमति से विवाह करते हैं, तो केवल उनके धर्म के आधार पर उन्हें अपराधी क्यों माना जाए?

सपा विधायक ने कहा कि Government को जबरन धर्म परिवर्तन और धोखाधड़ी जैसे मामलों पर कार्रवाई करने का अधिकार है, लेकिन कानून बनाते समय यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी बालिग व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता प्रभावित न हो.

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